
बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह वारंट बीते साल देश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद आया है, जिनके चलते हसीना को पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी।
वारंट जारी करने की वजह
बुधवार को ICT की तीन सदस्यीय पीठ ने हसीना और उनकी सरकार में शामिल कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में दर्ज आरोपों पर कार्रवाई की। ट्रिब्यूनल ने कहा कि हसीना और अन्य पर राजनीतिक विरोधियों को अवैध रूप से हिरासत में लेने, यातनाएं देने, और सुरक्षा एजेंसियों के जरिए गायब करने जैसे गंभीर आरोप हैं। बीडी न्यूज24 की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि कई लोगों को सीक्रेट ठिकानों पर बंद कर पूछताछ की गई और बाद में वे रहस्यमय तरीके से लापता हो गए।
किन-किन पर लगे हैं आरोप?
पहले मामले में, हसीना और उनके पूर्व सुरक्षा एवं रक्षा सलाहकार तारिक अहमद सिद्दीकी सहित 13 लोगों के खिलाफ पाँच प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। दूसरे मामले में, हसीना, सिद्दीकी और 15 अन्य अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) की टास्क फोर्स इंटरोगेशन यूनिट (TFIU) के सीक्रेट सेल में बंद कैदियों पर अत्याचार किया और उनकी गुमशुदगी में भूमिका निभाई।
ICT ने दोनों मामलों में संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है और उन्हें 22 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
भारत में शरण और मौजूदा स्थिति
गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भारत में शरण ली थी। उनकी पार्टी आवामी लीग सरकार के पतन के बाद से उनके खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां शुरू हो चुकी हैं। अब तक उन पर कई मुकदमे लंबित हैं और अनेकों गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं। इस बीच, 78 वर्षीय हसीना की भारत से वापसी को लेकर जब सवाल पूछा गया तो विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि “इस मुद्दे पर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत चल रही है।”
बड़ा सवाल: क्या अब गिरफ्तार होंगी शेख हसीना?
ट्रिब्यूनल के वारंट के बाद बांग्लादेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अब हसीना को भारत से प्रत्यर्पित कर वापस भेजा जाएगा, या फिर यह मामला एक और राजनीतिक विवाद का रूप लेगा। बांग्लादेश की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस केस पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह मामला न सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई है, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक साख की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।














