
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया, जिन्हें यमन में मौत की सजा सुनाई गई है, को बचाने की कोशिशें पूरे जोर-शोर से जारी हैं। जब से यह दुखद खबर सामने आई है, उनके परिवार वालों की आंखों से नींद उड़ गई है। हर दिन उनके लिए एक नई उम्मीद और एक नई बेचैनी लेकर आता है। सामाजिक संगठनों की भागीदारी ने इस लड़ाई को और मजबूत किया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई, जहाँ केंद्र सरकार ने बताया कि निमिषा की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और उन्हें बचाने के हर संभव प्रयास हो रहे हैं। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि हमारी प्राथमिकता है कि निमिषा प्रिया सही सलामत भारत लौटें।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संतोष जताया और अगली सुनवाई की तारीख 14 अगस्त तय की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है। यह उम्मीद की किरण है उस परिवार के लिए, जो दिन-रात अपनी बेटी के घर लौटने की दुआ कर रहा है।
बता दें कि 16 जुलाई को यमन में निमिषा को मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन केरल के ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने हस्तक्षेप कर सजा को फिलहाल रोक दिलाई। इस प्रयास से पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच समझौते की संभावना बनी है, लेकिन अब भी राहत की खबर का इंतजार बना हुआ है।
निमिषा को उनके यमन निवासी बिजनेस पार्टनर तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। लेकिन निमिषा का दावा है कि वह उत्पीड़न और जबरदस्ती के शिकार हुईं। उनके पासपोर्ट को जब्त कर लिया गया था और जब उन्होंने उसे वापस लेने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे बेहोश करने के लिए ड्रग्स दिया — लेकिन ओवरडोज से उसकी मौत हो गई। अब परिवार ब्लड मनी के विकल्प के तहत उनकी रिहाई की उम्मीद कर रहा है।













