
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। लगभग 21 घंटे तक चली इस लंबी चर्चा के बावजूद दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि तमाम प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया और अब वह अमेरिका लौट रहे हैं।
कई दौर की बातचीत, लेकिन नहीं निकला समाधान
इस अहम बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीन चरणों में बातचीत हुई, लेकिन हर दौर के बाद भी गतिरोध बरकरार रहा। जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका की प्राथमिक मांग थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और ठोस आश्वासन दे कि वह भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। हालांकि, ईरान इस मुद्दे पर झुकने को तैयार नहीं दिखा, जिसके चलते वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की सख्त शर्त
वेंस ने वार्ता के बाद कहा, “हमें इस बात की पुख्ता गारंटी चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा और न ही ऐसे संसाधनों को जुटाएगा, जिनसे वह तेजी से इस दिशा में काम कर सके।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिना किसी समझौते के वापस लौटना इस बात का संकेत है कि मतभेद अभी भी गंभीर हैं।
#WATCH US-ईरान शांति वार्ता | इस्लामाबाद, पाकिस्तान: US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वैन्स ने कहा, "... हम ऐसी परिस्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं, जहां ईरानी हमारी शर्तें मानने को तैयार हों। मुझे लगता है कि हम काफी फ्लेक्सिबल थे, हम काफी एडजस्टिंग थे। राष्ट्रपति ने हमसे कहा - आपको अच्छी… pic.twitter.com/8nMAYb6DRo
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 12, 2026
‘समझौता न होना ईरान के लिए ज्यादा नुकसान’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वेंस ने यह भी कहा कि इस बातचीत का निष्कर्ष न निकलना अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले 21 घंटों में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। उनके मुताबिक, अमेरिका ने अपनी शर्तों को स्पष्ट रखा, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
ईरान ने अमेरिका पर लगाए कड़े आरोप
दूसरी ओर, ईरान ने इस पूरे मामले में अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि किसी भी वार्ता की सफलता दोनों पक्षों के संतुलित और ईमानदार रवैये पर निर्भर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान अत्यधिक और अनुचित मांगें रखीं, जिससे सहमति बनना मुश्किल हो गया।
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, युद्ध मुआवजा और क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
अब आगे क्या?
इस वार्ता के विफल होने के बाद अब मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
हालांकि जेडी वेंस ने संकेत दिया कि अगर ईरान चाहे तो वह अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव पर दोबारा विचार कर सकता है, लेकिन उन्होंने भविष्य में संभावित बातचीत को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी। ऐसे में अगर दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।














