
इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता के किसी ठोस नतीजे पर न पहुंचने के बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत का सिलसिला थमा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां इस मीटिंग को ‘बेनतीजा’ या ‘डेड-एंड’ करार दिया जा रहा था, वहीं तेहरान ने इन अटकलों को खारिज करते हुए संकेत दिया कि संवाद की राह अब भी खुली हुई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मामला अभी खत्म नहीं हुआ है” और दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखने के इच्छुक हैं।
ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि इतने लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास और हालिया तनाव को देखते हुए एक ही बैठक में किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। बघाई के मुताबिक, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति जरूर बनी है, लेकिन अभी भी दो-तीन अहम विषय ऐसे हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद कायम हैं। इसके बावजूद ईरान बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में नजर आ रहा है।
ईरानी पक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा हालात में वार्ता आसान नहीं है। इस्माइल बघाई ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच 40 दिनों तक चले तनावपूर्ण हालात का असर अभी भी बना हुआ है। ऐसे माहौल में संदेह और अविश्वास होना स्वाभाविक है, और इसे खत्म करने में समय लगेगा।
Breaking | At Pakistan’s proposal and with the agreement of the negotiating teams of #Iran and the U.S., talks mediated by Pakistan will continue for another round after a pause on Sunday.#IslamabadTalks https://t.co/iWjWDjdjZb
— Government of the Islamic Republic of Iran (@Iran_GOV) April 11, 2026
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पक्ष को यह उम्मीद नहीं थी कि पहली ही बैठक में कोई बड़ा और निर्णायक समझौता हो जाएगा। उनके अनुसार, “न हमने और न ही किसी अन्य ने यह सोचा था कि एक ही दौर में डील फाइनल हो जाएगी।” यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि ईरान इस प्रक्रिया को एक लंबी और चरणबद्ध कूटनीतिक यात्रा के रूप में देख रहा है।
ईरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अब वार्ता की सफलता काफी हद तक अमेरिका के रुख पर निर्भर करती है। तेहरान का कहना है कि जब तक वॉशिंगटन ईरान के वैधानिक अधिकारों और उसके राष्ट्रीय हितों को स्वीकार नहीं करता, तब तक किसी ठोस समझौते तक पहुंचना मुश्किल रहेगा।
कुल मिलाकर, ईरान ने यह संकेत दे दिया है कि भले ही इस दौर की बातचीत से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला हो, लेकिन कूटनीतिक दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने की संभावना बनी हुई है, जिससे वैश्विक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।













