
मिडिल ईस्ट की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाते हुए पहले हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल समेत कई देशों में हवाई हमले किए, जिनमें खासकर अमेरिकी सैन्य अड्डों को टारगेट किया गया। कतर, दुबई, UAE और बहरीन जैसे देशों में हुए इन हमलों में ईरान ने कई प्रकार की बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया, जिससे भारी तबाही हुई।
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में ईरान ने कई तरह की बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें विकसित की हैं। इन मिसाइलों की लंबाई लगभग 10–20 मीटर तक हो सकती है और मारक क्षमता के लिहाज से ये पश्चिम एशिया के कई देशों तक पहुंच सकती हैं।
ईरान की मिसाइलों की पूरी सूची और उनकी मारक क्षमता
छोटी दूरी की मिसाइलें:
फतेह-110: करीब 300 किलोमीटर तक मार सकती है।
राद-500 और फतेह-313: लगभग 500 किलोमीटर तक प्रभावी।
ज़ुल्फिकार: करीब 700 किलोमीटर तक।
क़ियम-1: लगभग 800 किलोमीटर तक मारक।
इन मिसाइलों का मुख्य इस्तेमाल आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
मध्यम दूरी की मिसाइलें:
शाहाब-1 और शाहाब-2: 300–700 किलोमीटर तक मारक।
शाहाब-3: 1,300–1,450 किलोमीटर तक मार सकती है।
क़द्र और ग़दर: 1,600–2,000 किलोमीटर तक पहुंच सकती हैं।
इमाद: लगभग 1,700 किलोमीटर तक मारक।
ये मिसाइलें क्षेत्रीय स्तर पर दूर के देशों को भी निशाना बनाने की क्षमता रखती हैं।
लंबी दूरी की मिसाइलें और क्रूज़ मिसाइलें:
खोर्रमशहर और सज्जील: 2,000–2,500 किलोमीटर तक मारक।
सौमार (क्रूज़ मिसाइल): लगभग 2,500 किलोमीटर तक।
खैबरशेकर: करीब 1,450 किलोमीटर तक मारक।
ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा मानता है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में इन मिसाइलों की असली मारक क्षमता को लेकर विभिन्न दावे किए जाते हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यही अनुमानित दूरी मानी जाती है।













