
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा कतर के रास लफान स्थित विशाल गैस प्लांट पर किए गए मिसाइल हमले ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर झटका दिया है। इस हमले के बाद कतर से आने वाली एलएनजी सप्लाई अचानक रुक गई है, जिससे देश में ईंधन संकट की आशंका गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक देखने को मिल सकता है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों में कतर की भूमिका बेहद अहम रही है। देश अपनी प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा वहीं से आयात करता है। मौजूदा हालात में इस हमले के कारण भारत के कुल गैस आयात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 47.4 एमएमएससीएमडी गैस की रोजाना आपूर्ति बाधित हो गई है। चूंकि रास लफान कतर का प्रमुख निर्यात केंद्र है, इसलिए इसके ठप होने का सीधा असर भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों पर पड़ा है।
इस अचानक आई कमी का सबसे ज्यादा दबाव बिजली उत्पादन और उर्वरक उद्योगों पर पड़ने की संभावना है। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए प्राथमिकता तय करनी शुरू कर दी है। संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड गैस (PNG) और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई को बनाए रखने के लिए औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली गैस में कटौती की जा सकती है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने और उत्पादन में गिरावट आने का खतरा है।
वहीं, समुद्री मार्गों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। ईरान और कतर के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर खतरा मंडरा रहा है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, और यहां अस्थिरता का मतलब है कि सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत वैकल्पिक उपायों की तलाश में जुट गया है। सरकारी और निजी कंपनियां अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही हैं। उद्देश्य यही है कि किसी भी तरह देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके और संभावित संकट से बचा जा सके।














