
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि लगातार सैन्य दबाव और भारी नुकसान झेलने के बाद ईरान अब बातचीत की राह तलाशने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के अनुसार, तेहरान की ओर से बार-बार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन उनका कहना है कि अब बातचीत की पहल काफी देर से की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के चलते ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं पर लगातार प्रहार हो रहे हैं।
वर्ष 2025 के एमएलएस चैंपियन इंटर मियामी सीएफ के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान की सैन्य शक्ति को तेजी से कमजोर कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ओर से बातचीत के लिए लगातार फोन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे हमसे संपर्क कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि समझौता किस तरह संभव हो सकता है, लेकिन मैंने उनसे साफ कहा कि अब आप काफी देर से आए हैं।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि संयुक्त सैन्य अभियान अपेक्षा से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके कारण ईरानी सैन्य ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना और इजरायली बल मिलकर ईरान की रणनीतिक ताकत को योजनाबद्ध तरीके से खत्म कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान द्वारा दागी जाने वाली मिसाइलों के लॉन्च सिस्टम को कुछ ही मिनटों में निशाना बनाकर नष्ट कर दिया जाता है। ट्रंप ने कहा, “जैसे ही मिसाइल छोड़ी जाती है, चार मिनट के भीतर उसके लॉन्चर को खोजकर खत्म कर दिया जाता है।”
उन्होंने आगे बताया कि इस सैन्य अभियान के दौरान ईरान की नौसेना को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। ट्रंप के अनुसार, पिछले तीन दिनों में ईरान के करीब 24 नौसैनिक जहाजों को तबाह कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और उसके विमानन ढांचे को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ट्रंप ने कहा, “उनकी एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, इसलिए अब उनके पास प्रभावी एयर फोर्स या एयर डिफेंस नहीं बचा है।”
ट्रंप ने दावा किया कि अब तक ईरान की लगभग 60 प्रतिशत मिसाइल प्रणाली और करीब 64 प्रतिशत लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान के सुरक्षा तंत्र के अंदर के लोग मौजूदा नेतृत्व से दूरी बना लेते हैं, तो अमेरिका उस देश के लिए एक नए राजनीतिक भविष्य पर विचार करने को तैयार है।
इसी संदर्भ में ट्रंप ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड, सेना और पुलिस के सदस्यों से हथियार छोड़ने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा तंत्र के लोग मौजूदा नेतृत्व से अलग होकर सहयोग करते हैं तो उनके लिए नए अवसर खुल सकते हैं। ट्रंप ने विदेशों में तैनात ईरानी राजनयिकों से भी अपील की कि वे राजनीतिक बदलाव का समर्थन करें और एक नई दिशा में आगे बढ़ने में मदद करें। उन्होंने कहा, “हम दुनिया भर में मौजूद ईरानी डिप्लोमैट्स से भी अपील करते हैं कि वे शरण लें और एक बेहतर तथा नया ईरान बनाने में योगदान दें।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि जो लोग अमेरिका के साथ सहयोग करेंगे, उन्हें पूरी सुरक्षा और कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग सहयोग नहीं करेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के शब्दों में, “जो हमारे साथ आएंगे, उन्हें पूरी इम्यूनिटी और सुरक्षा मिलेगी, लेकिन विरोध करने वालों के लिए स्थिति बहुत कठिन हो सकती है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सैन्य अभियान के दीर्घकालिक प्रभाव पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक हो सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, इससे मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ने की संभावना है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इससे तेल की कीमतों, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान कई आतंकवादी संगठनों को समर्थन देता है और परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है। इन आरोपों और बढ़ते सैन्य टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। मध्य पूर्व से दुनिया के कई महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग गुजरते हैं, इसलिए इस इलाके में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ना तय माना जाता है।













