
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने अब समुद्री क्षेत्र में भी तनाव को काफी बढ़ा दिया है। फारस की खाड़ी में हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है।
गुरुवार को किए गए इस दावे के अनुसार, ईरानी नौसेना ने मिसाइल के जरिए टैंकर पर हमला किया, जिसके बाद जहाज में आग लग गई। IRGC का कहना है कि हमला इतना तीव्र था कि टैंकर में भारी नुकसान हुआ और वह समुद्र में जलता हुआ देखा गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया हमला
ईरानी सरकारी मीडिया Mehr News की रिपोर्ट के अनुसार, IRGC ने इस हमले को अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों की गतिविधियों को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है।
IRGC ने यह भी चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगी यूरोपीय देशों के किसी भी सैन्य या व्यावसायिक जहाज को बख्शा नहीं जाएगा। यदि ऐसे जहाज ईरान की निगरानी में आते हैं, तो उन्हें टारगेट किया जा सकता है।
ईरान ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध जैसे हालात में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण रहेगा और वह अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
अमेरिकी सबमरीन की कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
यह घटना उस समय सामने आई जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार यह युद्धपोत भारत में आयोजित MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल होकर वापस लौट रहा था।
बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद 100 से अधिक क्रू मेंबर्स की मौत की आशंका जताई जा रही है। ईरान ने इस घटना को “बिना किसी चेतावनी के किया गया हमला” बताया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ करार दिया है।
IRGC ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद जवाबी कदम उठाना जरूरी था और तेल टैंकर पर हमला उसी “टिट-फॉर-टैट” रणनीति का हिस्सा है।
ईरान के दावे पर अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरान के इस दावे को लेकर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले भी अमेरिकी प्रशासन ने कई बार ईरानी दावों को “भ्रामक” या “फेक न्यूज” करार दिया है।
हालांकि यदि यह घटना सही साबित होती है तो फारस की खाड़ी में समुद्री व्यापार और शिपिंग के लिए खतरा काफी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक अहमियत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देता है।
हाल के दिनों में इस इलाके में कई तेल टैंकरों और जहाजों पर हमले की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ गई है।
पहले भी कर चुका है ऐसे दावे
ईरान ने इससे पहले भी यह दावा किया था कि उसने अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया है और कुछ समय के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था।
वहीं दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई में ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, संघर्ष के दौरान ईरान के 20 से अधिक जहाजों को नष्ट किया जा चुका है, जिनमें सुलैमानी क्लास के युद्धपोत भी शामिल बताए जाते हैं।
CENTCOM ने यहां तक दावा किया कि मौजूदा हालात में ईरानी नौसेना की क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है और क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही नजर आ रहा है।













