
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक अहम बयान में स्वीकार किया है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं किया। इस स्वीकारोक्ति के साथ उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया है जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर मध्यस्थता कराई थी। डार का यह बयान भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सामने आया है, जो कि पाहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा सीमा पार आतंकवादी ठिकानों पर की गई कार्रवाई थी।
डार ने बताया कि अमेरिका ने मई महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर एक प्रस्ताव भेजा था और सुझाव दिया था कि दोनों देश किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता करें। शुरुआत में उन्हें अमेरिकी अधिकारी रुबियो द्वारा बताया गया कि जल्द ही बातचीत हो सकती है, लेकिन जब जुलाई में उन्होंने इसपर फिर जानकारी मांगी तो स्पष्ट कर दिया गया कि भारत इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं है। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।
डार ने आगे कहा कि पाकिस्तान को किसी तीसरे पक्ष की भूमिका से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भारत हमेशा से यह कहता आया है कि यह केवल भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान द्विपक्षीय बातचीत के लिए भी तैयार है, बशर्ते बातचीत सभी मुद्दों पर हो—जैसे कि आतंकवाद, व्यापार, अर्थव्यवस्था और जम्मू-कश्मीर। डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, और उसका रुख हमेशा संवाद के पक्ष में रहा है, लेकिन बातचीत के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है।
भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ढांचों और स्लीपर सेल्स को निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया था। यह ऑपरेशन पाहलगाम हमले में भारतीय नागरिकों की हत्या के बाद एक निर्णायक जवाब के रूप में सामने आया। पाकिस्तान ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि वह बातचीत के लिए अब भी तैयार है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत की उस नीति की पुष्टि कर दी है जिसमें वह किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को पूरी तरह से नकारता है। अब पाकिस्तान ने भी इस तथ्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है, जिससे अमेरिका या अन्य किसी भी बाहरी ताकत के हस्तक्षेप की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।













