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अगर अमेरिका ने तेहरान पर हवाई हमला किया तो ईरान का अगला कदम क्या होगा? खामेनेई की रणनीति उजागर, ट्रंप के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अगर अमेरिका ने तेहरान पर हवाई हमला किया तो ईरान किस तरह जवाब देगा? खामेनेई की रणनीति, ट्रंप की चेतावनी, संसद की धमकी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की पूरी तस्वीर पढ़ें।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Sun, 11 Jan 2026 5:38:16

अगर अमेरिका ने तेहरान पर हवाई हमला किया तो ईरान का अगला कदम क्या होगा? खामेनेई की रणनीति उजागर, ट्रंप के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ बीते कई दिनों से विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान की जनता की मदद के लिए तैयार है। ऐसे माहौल में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर विरोध प्रदर्शनों की आड़ में अमेरिका ने तेहरान पर एयरस्ट्राइक की, तो ईरान की प्रतिक्रिया कैसी होगी? अब इस संभावित टकराव को लेकर ईरान का पूरा ब्लूप्रिंट सामने आने लगा है।

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने खुली चेतावनी दी है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के मुताबिक अमेरिका ने इस्लामी गणराज्य पर हमला किया, तो उसका जवाब बेहद आक्रामक होगा। कालीबाफ ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान अमेरिकी सेना और इजरायल—दोनों को सीधे निशाना बनाएगा। यह बयान ऐसे समय आया जब ईरानी संसद में माहौल बेहद गर्म था और सांसद मंच पर चढ़कर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे।

विदेशों में रह रहे ईरानियों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि इंटरनेट पर लगी पाबंदियां और सूचनाओं पर नियंत्रण, सुरक्षा एजेंसियों के भीतर मौजूद कट्टरपंथी तत्वों को हिंसक कार्रवाई के लिए उकसा सकता है। हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि यदि जरूरत पड़ी तो वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए भी सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

ईरान की जनता के साथ अमेरिका: ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने लिखा, “ईरान शायद ऐसी आज़ादी की ओर बढ़ रहा है, जैसी उसने पहले कभी नहीं देखी। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।” न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि शनिवार रात ट्रंप को ईरान पर हमले से जुड़े कई सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई थी, लेकिन उस वक्त तक किसी अंतिम फैसले पर मुहर नहीं लगी थी।

अमेरिकी विदेश विभाग ने भी अलग अंदाज में चेतावनी जारी करते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप को हल्के में न लें। जब वह कुछ करने की बात कहते हैं, तो उसे अंजाम तक पहुंचाने का इरादा रखते हैं।”

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने संसद सत्र का सीधा प्रसारण किया, जहां कट्टरपंथी नेता कालीबाफ ने अपने भाषण में पुलिस और अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड्स—खासतौर पर स्वयंसेवी बासिज बल—की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन बलों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान मजबूती से मोर्चा संभाला। गौरतलब है कि कालीबाफ खुद भी ईरान के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रह चुके हैं।

अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान का जवाब क्या होगा?

कालीबाफ ने अपने बयान में इजरायल को “कब्जा किया हुआ क्षेत्र” करार देते हुए अमेरिका को सीधे चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर ईरान पर हमला होता है तो कब्जे वाले क्षेत्र के साथ-साथ इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने, अड्डे और जहाज हमारे वैध लक्ष्य होंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान खुद को सिर्फ हमले के बाद जवाब देने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि किसी भी ठोस खतरे के संकेत पर पहले से कार्रवाई कर सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम पर इजरायल भी पैनी नजर बनाए हुए है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रात भर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की, जिसमें ईरान समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

रजा पहलवी की प्रदर्शनकारियों से अपील

ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी, जिन्होंने हाल ही में गुरुवार और शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया था, ने एक नए संदेश के जरिए प्रदर्शनकारियों से रविवार को भी सड़कों पर उतरने की अपील की। उन्होंने लोगों से ईरान के पुराने शेर-और-सूर्य वाले झंडे और शाह के दौर में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने को कहा, ताकि जनता अपने अधिकारों का खुलकर प्रदर्शन कर सके।

ईरान में विरोध की शुरुआत कब हुई?

ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए, जब देश की मुद्रा रियाल के मूल्य में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। हालात यह हैं कि एक डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल से भी ऊपर पहुंच गई है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। धीरे-धीरे ये प्रदर्शन सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित न रहकर धार्मिक सत्ता के खिलाफ सीधी चुनौती में बदल गए, जिससे देश की सियासत और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

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