
दुनियाभर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई का दबाव तेज हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है और ब्रेंट क्रूड ने 120 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर लिया है, जो पिछले लगभग चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इस उछाल के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बिगड़ती स्थिति बताई जा रही है। इस भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को झटका दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव बन सकता है।
अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई तेल बाजार की चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के समुद्री क्षेत्रों और तेल ढुलाई मार्गों पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है, साथ ही कई टैंकरों की आवाजाही पर भी रोक जैसी स्थिति बन गई है। दूसरी ओर ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है और किसी तरह के दबाव में झुकने के संकेत नहीं दे रहा। दोनों देशों के बीच यह टकराव अब सीधे तौर पर वैश्विक तेल सप्लाई चेन को प्रभावित करने लगा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से सप्लाई बाधित
दुनिया के सबसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। इस रास्ते से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है, लेकिन मौजूदा तनाव के चलते यहां आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल टैंकरों की आवाजाही में रुकावट के कारण सप्लाई लगभग बाधित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका साबित हो सकती है।
सप्लाई में गिरावट से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा संकट के चलते वैश्विक स्तर पर भारी मात्रा में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे करीब एक अरब बैरल तक की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है। ट्रेडर्स का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है।
अमेरिकी कदमों से बढ़ सकता है तनाव और
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ईरान से जुड़े तेल व्यापार और टैंकरों पर सख्त कार्रवाई की योजना पर काम कर रहा है। इसके साथ ही अन्य देशों को भी इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। वहीं मिडिल ईस्ट क्षेत्र में सैन्य संसाधनों और आधुनिक हथियारों की तैनाती बढ़ाने की तैयारी भी बताई जा रही है। इन कदमों से यह संकेत मिल रहा है कि यह संकट फिलहाल थमने के बजाय और गहरा सकता है।
भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेज उछाल का सबसे सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और रुपये की स्थिति भी कमजोर हो सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे में भी बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा है।
क्या कीमतें और ऊपर जाएंगी?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ और होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया, तो कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल वैश्विक बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और निवेशक बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।













