
नवजात शिशु का पहला रोना हमेशा ही खुशियों और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता रहा है। छोटे मेहमान पर प्यार लुटाना हर किसी को बेहद भाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्म के समय बच्चे की रोने की आवाज़ के पीछे क्या विज्ञान है और इसे खास नाम क्या दिया गया है? यदि नहीं, तो आइए विस्तार से जानते हैं।
बच्चे जन्म लेते ही क्यों रोते हैं?
जन्म के समय बच्चे का रोना उनके स्वस्थ होने का संकेत माना जाता है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शिशु का रोना फेफड़ों को सक्रिय करने और सांस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी होता है। गर्भ के गर्म वातावरण से अचानक बाहर ठंडी हवा में आने पर शिशु के शरीर में यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है।
इसके अलावा, जन्म के समय बच्चे का रोना फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह शुरू होता है। इस तरह रोना सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि शारीरिक विकास और जीवन के लिए जरूरी प्रक्रिया भी है।
जन्म के समय रोने को क्या कहते हैं?
आमतौर पर बच्चों के रोने को “Cry” या “Weep” कहा जाता है। लेकिन जन्म के साथ ही जब बच्चा पहली बार रोता है, तब इस खास रोने को एक अलग शब्द से जाना जाता है। विशेषज्ञों और शब्दकोशों के अनुसार, नवजात शिशु के जन्म के समय पहली बार रोने की आवाज़ को Vagitus कहा जाता है।
Vagitus केवल जन्म लेते ही शिशु के रोने के लिए प्रयुक्त होता है और यह संकेत देता है कि बच्चा स्वस्थ है और उसकी फेफड़ों की क्रियाशीलता सही है। जन्म के तुरंत बाद यह रोना बच्चों के जीवन की शुरुआत का पहला संकेत माना जाता है।
रोने के पीछे छिपा विज्ञान
जन्म के समय रोने की यह प्रक्रिया शिशु के फेफड़ों और श्वसन तंत्र को सक्रिय करने के साथ-साथ उसके आसपास की दुनिया से परिचित होने की शुरुआती प्रतिक्रिया भी है। यह सुनिश्चित करता है कि नवजात शिशु को तुरंत ऑक्सीजन मिलना शुरू हो जाए और जीवन की पहली सांस सुरक्षित तरीके से ली जा सके।
इसलिए, जब भी आप अस्पताल में जन्म लेते शिशु को रोते हुए देखें, तो समझिए कि यह केवल एक आवाज़ नहीं, बल्कि जीवन की पहली जीत है।













