
अगर आपने कभी किसी ग्लेशियर पर लाल रंग का झरना बहता हुआ देखा, तो पहला सवाल यही उठता होगा – क्या यह खून है? सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को भ्रम में डाल दिया है।
इस वीडियो में बर्फीली चट्टानों के बीच लाल रंग की धार बहती नजर आ रही है। देखने में ऐसा लग रहा है जैसे ग्लेशियर से खून की नदी निकल रही हो। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। यह कोई खून नहीं बल्कि लाल रंग का पानी है, जिसे ब्लड फॉल्स (Blood Falls) के नाम से जाना जाता है। सफेद बर्फ पर बहते हुए यह पानी खून जैसा लाल प्रतीत होता है, इसलिए इसे देखकर भ्रम होना स्वाभाविक है।
Deep in Antarctica a five-story waterfall pours a red liquid into the white void. This is the Blood Falls. A reservoir of iron-rich water, trapped under the ice for 2 million years without oxygen, “rusts” instantly the second it hits the air. pic.twitter.com/UvniCMLQJ6
— HOW THINGS WORK (@HowThingsWork_) February 6, 2026
ब्लड फॉल्स: लाल रंग का रहस्य
दरअसल, यह लाल पानी अंटार्कटिका के टेलर ग्लेशियर पर बहता है। टेलर ग्लेशियर के नीचे एक झील है, जो लगभग 20 लाख साल से पूरी तरह सतह से अलग है। झील में ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक खारापन है। अंटार्कटिका के अत्यधिक ठंडे तापमान के कारण यह झील जमती नहीं है।
जब यह खारा पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर आता है और वातावरण की ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो इसमें मौजूद लौह तत्व (Iron) ऑक्सीडाइज होकर लाल रंग में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया वैसी ही है जैसे लोहे पर जंग लगने पर उसका रंग लाल हो जाता है। यही कारण है कि ग्लेशियर पर गिरते पानी का रंग गहरा लाल नजर आता है।
वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जानकारी
ब्लड फॉल्स की खोज 1911 में वैज्ञानिक थॉमस गिफिथ टलेर ने की थी। इसे देखकर शुरुआती दौर में लोगों को यह खून जैसा ही प्रतीत होता था, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे लौह युक्त खारा पानी बताते हैं।
यह पानी आयरन से भरपूर है और हवा के संपर्क में आने पर लाल रंग धारण कर लेता है। इसलिए अगर कभी किसी ग्लेशियर पर लाल झरना दिखे तो उसे रक्त जलप्रपात (Blood Falls) समझें, खून नहीं।














