
नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस के समुद्र में फंसे तेल के जहाजों को भारत तक पहुँचाने की अनुमति दे दी है। यह केवल 30 दिन की अस्थायी छूट है। रॉयटर्स से बातचीत में दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम होगा और भारत को तेल संकट के बीच थोड़ी राहत मिल सकेगी।
भारत का तेल भंडार सिर्फ 25 दिन का
भारत को अधिकांश कच्चा तेल मध्यपूर्व से आता है। देश में फिलहाल केवल 25 दिन का तेल स्टॉक उपलब्ध है और लगभग 40 प्रतिशत तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते गुजरता है। यदि इस मार्ग में कोई अड़चन आती, तो तेल की आपूर्ति मुश्किल में पड़ सकती थी। इसी कारण अमेरिकी प्रशासन ने यह अस्थायी राहत दी। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया, “हमने रूस के समुद्र में फंसे तेल की बिक्री भारत को जारी रखने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट मंजूर की है।”
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। हालांकि, जनवरी से कई रिफाइनरियों ने खरीद कम कर दी थी क्योंकि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता था कि रूस को भुगतान न मिले। इस छूट से भारत को 25 प्रतिशत टैरिफ का खतरा टल गया और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता भी संभव हुआ।
भारतीय रिफाइनरियों की रफ्तार फिर शुरू
अब सरकारी रिफाइनरी कंपनियाँ सक्रिय हो गई हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने ट्रेडर्स के साथ संपर्क बढ़ा दिया है ताकि जल्द से जल्द रूस का तेल प्राप्त हो सके। सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों ने पहले ही लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी क्रूड तेल खरीद लिया है।
तेल की गुणवत्ता और उपलब्धता पर ध्यान
HPCL और MRPL अब नवंबर के बाद पहली बार रूसी तेल की डिलीवरी लेने की तैयारी में हैं। ट्रेडर्स मार्च और अप्रैल में आने वाले रूसी यूराल्स क्रूड को ब्रेंट क्रूड से 4-5 डॉलर प्रति बैरल महंगा बेच रहे हैं, जबकि फरवरी में यही तेल ब्रेंट से 13 डॉलर सस्ता था।
एक ट्रेडर ने बताया, “अब भारतीय रिफाइनरी केवल कीमत नहीं देख रही हैं, बल्कि तेल के मॉलिक्यूल्स और उसकी उपलब्धता उनके लिए सबसे अहम है।” रिलायंस इंडस्ट्रीज भी ट्रेडर्स से संपर्क में हैं ताकि जल्दी से जल्दी रूसी तेल उपलब्ध हो सके।
छूट सिर्फ फंसे हुए कार्गो के लिए
यह छूट केवल समुद्र में फंसे हुए तेल के कार्गो पर लागू है। 30 दिन के बाद क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। फिलहाल, भारत की रिफाइनरी कंपनियों को राहत मिल गई है और आने वाले दिनों में बाजार में रूसी तेल की आवक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।













