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ममता बनर्जी की TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, अलग ‘असली तृणमूल’ बनाने की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

TMC में अंदरूनी कलह और असंतोष बढ़ने की खबरों के बीच ‘असली तृणमूल’ बनाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निलंबन के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ी है और पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलें लग रही हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 02 Jun 2026 12:09:52

ममता बनर्जी की TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, अलग ‘असली तृणमूल’ बनाने की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजरती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और गहराता जा रहा है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान, नाराज विधायकों की सक्रियता और कथित गुप्त बैठकों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। इसी बीच यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या राज्य की राजनीति में एक बार फिर किसी बड़े विभाजन की भूमिका तैयार हो रही है, जैसा पहले महाराष्ट्र में देखा गया था।

ऋतब्रत बन सकते हैं नए राजनीतिक ध्रुव

हाल ही में पार्टी ने विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निलंबित किया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि ऋतब्रत बनर्जी भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का चेहरा बन सकते हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि वे उस तरह की रणनीति पर काम कर रहे हैं जैसी पहले महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने अपनाई थी, जब बड़ी संख्या में विधायकों के साथ उन्होंने अलग राजनीतिक धड़ा खड़ा किया था।

सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा लंबे समय से पार्टी बैठकों से दूरी बनाए हुए थे, जिसे पहले ही अंदरूनी असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा था। अब यही दूरी एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका के रूप में चर्चा में है।

‘असली तृणमूल’ को लेकर हलचल तेज

पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में हाल के दिनों में कई अहम बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में पार्टी के भविष्य, संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव और एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के गठन जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।

सूत्रों का कहना है कि TMC के लगभग 15 से 20 विधायक ऐसे नेताओं के संपर्क में हैं जो मौजूदा नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। यही समूह कथित तौर पर ‘असली तृणमूल’ नाम से एक अलग राजनीतिक पहचान बनाने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अभी तक स्पष्ट रूप से कोई बड़ा बयान नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नेतृत्व इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

निष्कासन के बाद बढ़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली से विधायक संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। आरोप यह भी लगाए गए कि दोनों नेताओं ने पार्टी की आंतरिक प्रक्रियाओं और प्रस्तावों को लेकर सवाल खड़े किए थे।

बताया जाता है कि विपक्ष के नेता से जुड़े कुछ प्रस्तावों और हस्ताक्षर प्रक्रिया पर भी इन विधायकों ने आपत्ति जताई थी। निष्कासन के बाद जब पार्टी स्तर पर बैठकें बुलाई गईं, तो दोनों नेता उन बैठकों में शामिल नहीं हुए, जिससे विवाद और अधिक गहरा गया।

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