इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम का निराशाजनक प्रदर्शन आखिरकार एक और सीरीज हार के साथ खत्म हुआ। चाहे टी20 श्रृंखला रही हो या वनडे मुकाबले, टीम इंडिया लगातार संघर्ष करती नजर आई और पूरे दौरे में जीत का स्वाद बेहद कम चखने को मिला। दोनों प्रारूपों को मिलाकर भारत ने कुल आठ मैच खेले, जिनमें सिर्फ एक मुकाबले में ही जीत दर्ज कर सका। ऐसे में वनडे सीरीज के अंतिम मैच में मिली हार के बाद कप्तान शुभमन गिल की रणनीति और फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मुकाबले की दिशा काफी हद तक टॉस और उसके बाद चुनी गई प्लेइंग इलेवन से ही तय हो गई थी। अब टीम इंडिया का अगला पड़ाव जिम्बाब्वे दौरा होगा, लेकिन उससे पहले इंग्लैंड दौरे के प्रदर्शन की गंभीर समीक्षा जरूरी मानी जा रही है।
टॉस हारने के बाद भी नहीं बदली रणनीति, कुलदीप यादव फिर रहे बाहर
अंतिम वनडे में जब दोनों कप्तान टॉस के लिए मैदान पर पहुंचे तो किस्मत ने इंग्लैंड का साथ दिया और भारत को पहले गेंदबाजी करनी पड़ी। टॉस हारना किसी भी टीम के नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन उसके बाद टीम संयोजन को लेकर लिए गए फैसलों ने कई सवाल खड़े कर दिए। पिच की परिस्थितियां स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जा रही थीं, इसके बावजूद कप्तान शुभमन गिल ने एक बार फिर कुलदीप यादव को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। यह फैसला मैच के दौरान लगातार चर्चा का विषय बना रहा।
इंग्लैंड ने स्पिन का उठाया फायदा, भारत सिर्फ एक विशेषज्ञ स्पिनर के साथ उतरा
इंग्लैंड ने अपनी गेंदबाजी में स्पिनरों का प्रभावी उपयोग किया। अनुभवी लेग स्पिनर आदिल रशीद ने अपनी फिरकी से भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया, जबकि जैकब बैथल ने भी अहम सफलता हासिल की। दूसरी ओर भारतीय टीम केवल अक्षर पटेल के रूप में एक विशेषज्ञ स्पिनर के साथ मैदान में उतरी। मौजूदा टीम संयोजन में ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान दे सकें। इसी वजह से कुलदीप यादव जैसे अनुभवी स्पिनर लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठे रहे। जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी क्षमता किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में उनका बेंच पर रहना टीम संतुलन को प्रभावित करता नजर आया।
आखिरी दो ओवरों ने पलट दी मैच की तस्वीर
भारतीय गेंदबाजों की अंतिम ओवरों में कमजोर रणनीति का फायदा इंग्लैंड ने पूरी तरह उठाया। निर्धारित 50 ओवर में मेजबान टीम ने 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। खास बात यह रही कि 48 ओवर की समाप्ति तक इंग्लैंड का स्कोर 348 रन था, लेकिन आखिरी दो ओवरों में भारतीय गेंदबाज रन रोकने में पूरी तरह विफल रहे। 49वें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा ने 23 रन खर्च किए, जबकि अंतिम ओवर में प्रिंस यादव ने 16 रन दिए। इन दोनों ओवरों में बने 39 अतिरिक्त रन अंततः मैच के नतीजे पर निर्णायक साबित हुए और भारत के सामने लक्ष्य और भी मुश्किल हो गया।
बड़े लक्ष्य के बावजूद धीमी रही भारतीय शुरुआत
388 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम से तेज शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती ओवरों में रन गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने पारी की शुरुआत संभलकर की, जिससे रनरेट लगातार दबाव में रहा। रोहित शर्मा ने बाद में अपने आक्रामक अंदाज से इसकी भरपाई करने की कोशिश की, लेकिन शुभमन गिल उस गति से बल्लेबाजी नहीं कर सके जिसकी ऐसे लक्ष्य का पीछा करते समय जरूरत थी। गिल ने 84 गेंदों में 77 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और एक छक्का शामिल रहा। उनका स्ट्राइक रेट 91.67 रहा, जिसे इतने बड़े लक्ष्य के मुकाबले धीमा माना जा रहा है।
रोहित शर्मा और विराट कोहली ने दिखाई लड़ाई, लेकिन बाकी बल्लेबाज नहीं निभा सके जिम्मेदारी
भारत की ओर से सबसे दमदार प्रदर्शन रोहित शर्मा और विराट कोहली ने किया। दोनों बल्लेबाजों ने जीत के लिए पूरा दम लगाया और लंबे समय तक टीम को मुकाबले में बनाए रखा। रोहित शर्मा ने 110 गेंदों में 138 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 17 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 125.45 रहा। वहीं विराट कोहली ने भी 60 गेंदों में 74 रन बनाए। उनकी पारी में चार चौके और तीन छक्के शामिल रहे तथा उनका स्ट्राइक रेट 123.33 का रहा। जब तक ये दोनों बल्लेबाज क्रीज पर मौजूद थे, भारत की जीत की उम्मीद बनी हुई थी। लेकिन उनके आउट होते ही मध्यक्रम पूरी तरह बिखर गया। ईशान किशन 12 गेंदों में 14 रन ही बना सके, केएल राहुल ने 8 गेंदों पर 12 रन जोड़े, जबकि श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। निचले क्रम से भी अपेक्षित योगदान नहीं मिला और अंततः टीम इंडिया को एक और निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा।













