
उत्तराखंड में स्थित बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा एक बार फिर से शुरू हो गई है। भगवान शिव के पावन 11वें ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु अब दोबारा रास्ता पकड़ सकते हैं, लेकिन इस बार उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा दूरी पैदल तय करनी पड़ेगी। हालिया भूस्खलन के कारण यह यात्रा पिछले कुछ दिनों से स्थगित थी।
भूस्खलन के बाद स्थिति में कुछ सुधार
रुद्रप्रयाग जिले के पुलिस अधीक्षक सर्वेश सिंह पंवार ने बताया कि मुख्य सड़क मार्ग, जो पहले पूरी तरह बाधित था, अब कुछ हद तक पैदल चलने योग्य बना दिया गया है। इसके चलते शनिवार को यात्रियों का पहला जत्था सोनप्रयाग से गौरीकुंड होते हुए बाबा केदारनाथ के लिए रवाना किया गया।
22 किलोमीटर का पैदल रास्ता
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़क पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती, तब तक श्रद्धालुओं को लगभग 22 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा के धाम तक पहुंचना होगा। मौसम की नाजुकता को देखते हुए अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बारिश की स्थिति में आवाजाही को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
मौसम के अनुसार करें योजना
यात्रियों से प्रशासन ने अनुरोध किया है कि वे मौसम पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। पुलिस का कहना है कि सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच सड़क टूटने के कारण यात्रा पिछले कुछ दिनों से बंद थी और केवल लौट रहे श्रद्धालुओं को सुरक्षा बलों की निगरानी में वैकल्पिक रास्ते से नीचे लाया जा रहा था।
तेज बारिश बनी बाधा
गौरतलब है कि बीते बुधवार रात उत्तराखंड में मूसलधार बारिश हुई थी, जिससे सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मुनकटिया नामक स्थान पर सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। नतीजतन, केदारनाथ की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया और धाम की यात्रा रोक दी गई थी।
2000 श्रद्धालु बीच रास्ते में रोके गए थे
सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने करीब 2000 तीर्थयात्रियों को बीच में ही रोके रखा। जानकारी के अनुसार, मुनकटिया क्षेत्र में भूस्खलन से सड़क का लगभग 50 मीटर हिस्सा बह गया, जिससे किसी भी प्रकार की गाड़ी वहां से गुजरना असंभव हो गया।
वैकल्पिक मार्ग भी हुआ क्षतिग्रस्त
भारी बारिश ने वैकल्पिक पैदल मार्ग को भी नहीं बख्शा। इस वजह से केदारनाथ धाम से नीचे आ रहे कई श्रद्धालु गौरीकुंड में ही फंस गए। स्थिति अब कुछ हद तक काबू में है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सावधानी अत्यंत आवश्यक है।














