
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में लगे आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा गया है।
यह निर्णय पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल शामिल थे, ने सुनाया। इससे पहले इस मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के इस नए फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस चर्चित केस में बड़ा मोड़ आ गया है।
2019 में सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 11 जनवरी 2019 को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद गुरमीत राम रहीम और अन्य सह-आरोपियों ने इस निर्णय को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट में इस मामले पर लंबी सुनवाई चली, जिसमें सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है।
2002 में हुई थी पत्रकार की हत्या
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या वर्ष 2002 में हुई थी। वह “पूरा सच” नामक अखबार के संपादक थे और अपने लेखों के कारण काफी चर्चा में रहते थे। उस समय यह मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था और लंबे समय तक इसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही।
करीब दो दशक से ज्यादा समय से चल रहे इस केस में 2019 में सीबीआई कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया था, लेकिन अब हाई कोर्ट के निर्णय ने मामले की दिशा बदल दी है। अदालत ने जहां गुरमीत राम रहीम को आरोपों से मुक्त कर दिया, वहीं अन्य तीन दोषियों की सजा को यथावत रखा है।
फैसले के बाद परिवार ने जताई नाराजगी
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके लिए बेहद निराशाजनक है।
अंशुल छत्रपति ने कहा, “हाई कोर्ट का यह फैसला निराशाजनक है। डेरा प्रमुख को बरी कर दिया गया है, जबकि बाकी लोगों की सजा बरकरार रखी गई है। हमारी कानूनी लड़ाई 2002 में शुरू हुई थी और आज ऐसा लग रहा है कि हम फिर उसी मोड़ पर आ गए हैं। सीबीआई कोर्ट ने उस समय पूरे मामले को स्पष्ट कर दिया था।”
उन्होंने आगे कहा कि परिवार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। अंशुल छत्रपति के मुताबिक, “हम इस निर्णय के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें उम्मीद है कि सीबीआई भी इस फैसले को चुनौती देगी। इससे पहले भी हमें कई झटके लगे हैं, लेकिन हम जिस हिम्मत और विश्वास के साथ अब तक लड़ते आए हैं, उसी तरह आगे भी न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।”













