
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के पांच दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन नहीं किया जा सका है। सरकार ने कुल आठ नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जिनमें दो कैबिनेट मंत्री, दो राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और चार राज्य मंत्री शामिल हैं। इसके बावजूद विभागों के बंटवारे पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को पदोन्नत करते हुए स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश सिंह राजपूत को राज्य मंत्री के रूप में टीम सरकार में शामिल किया गया है। लेकिन इनके जिम्मेदारी वाले विभागों की सूची अभी तक जारी नहीं की गई है।
विभाग बंटवारे को लेकर अंदरखाने मंथन तेज
सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक विचार-विमर्श इन्हीं नए मंत्रियों के विभागों के आवंटन को लेकर चल रहा है। खासतौर पर दो कैबिनेट मंत्रियों और दो स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को कौन-सा विभाग दिया जाए, इस पर संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर गहन चर्चा जारी है। मौजूदा विभागों में संभावित फेरबदल और राजनीतिक-सामाजिक संतुलन साधने की कोशिशों के चलते फैसला अटका हुआ है।
कई विभागों की अहमियत और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो गई है। बताया जा रहा है कि सरकार हर नियुक्ति और विभाग वितरण में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जातीय संतुलन को साधने की कोशिश कर रही है, जिससे अंतिम फैसला लेने में देरी हो रही है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
इस बीच, गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली दौरे पर पहुंचे, जहां उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि विभागों के बंटवारे को लेकर कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।
सूत्रों का मानना है कि जिन विभागों को लेकर राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद या विचार-विमर्श चल रहा है, उन्हीं कारणों से घोषणा में देरी हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
रणनीतिक संतुलन पर टिकी नजरें
विभागों के बंटवारे में केवल प्रशासनिक जरूरतें ही नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी कारण हर कदम बेहद सावधानी के साथ उठाया जा रहा है।
फिलहाल राजनीतिक हलकों में यह सवाल बना हुआ है कि किन मंत्रियों को कौन-सा महत्वपूर्ण विभाग मिलेगा और किसे किन जिम्मेदारियों से नवाजा जाएगा। सभी की निगाहें अब मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं, जो इस लंबे इंतजार को खत्म करेगी।














