
उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने सरकार और चुनाव आयोग के सामने एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सीटों और पदों पर समुचित आरक्षण देने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। चंद्रशेखर आज़ाद का कहना है कि यह मामला सिर्फ चुनावी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
नगीना सांसद ने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और राज्य निर्वाचन आयोग को औपचारिक रूप से पत्र भेजा है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रस्तावित पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर गंभीर संवैधानिक और सामाजिक सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो यह न सिर्फ एक बड़े वर्ग के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि सामाजिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
पंचायतों में ओबीसी प्रतिनिधित्व अनिवार्य
चंद्रशेखर आज़ाद ने जोर देकर कहा कि ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायतों तक ओबीसी समाज को उसका उचित प्रतिनिधित्व मिलना बेहद जरूरी है। अगर पंचायत स्तर पर इस वर्ग को हिस्सेदारी नहीं दी गई, तो यह केवल एक समुदाय के साथ अन्याय नहीं होगा, बल्कि संविधान में निहित सामाजिक न्याय की भावना को भी कमजोर करेगा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 243D(6) का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत राज्य सरकार को पंचायतों में ओबीसी आरक्षण लागू करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
सरकार की जिम्मेदारी और पुराना अनुभव
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने यह भी कहा कि ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने 2023 के नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार की तैयारियों में कमी के कारण हाईकोर्ट को चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी थी। बाद में सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े, जिससे चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
सरकार की निष्क्रियता पर चिंता
चंद्रशेखर आज़ाद ने चिंता जताई कि 2023 के अनुभव से सबक लेने के बजाय पंचायत चुनावों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट, समयबद्ध और पारदर्शी कार्ययोजना सामने नहीं आई है। उनका कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है और यह भी संकेत देती है कि सरकार ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसी चूक से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
स्पष्ट मांग: बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव न हों
नगीना सांसद ने अपनी मांग को साफ शब्दों में रखते हुए कहा कि आगामी पंचायत चुनावों में हर हाल में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। सरकार को चाहिए कि पिछली गलतियों से सीख लेते हुए समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करे, ताकि किसी भी परिस्थिति में पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना न कराए जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई विशेष रियायत या राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है, जिसे लागू करना सरकार का कर्तव्य है।
चंद्रशेखर आज़ाद की इस पहल के बाद पंचायत चुनावों से पहले ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। अब देखना यह होगा कि सरकार और राज्य चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाते हैं और आने वाले चुनावों में सामाजिक न्याय को किस हद तक प्राथमिकता दी जाती है।













