
संभल में बीते साल भड़की हिंसा को लेकर गठित तीन सदस्यीय आयोग ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी। यह रिपोर्ट 450 पन्नों की है और इसमें कई अहम तथ्य उजागर हुए हैं। आयोग ने स्पष्ट लिखा है कि सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के विवादित बयान के बाद ही हालात बेकाबू हुए। रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी लोगों को बुलाकर भीड़ भड़काई गई और विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसे एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया गया है।
रिपोर्ट केवल 24 नवंबर 2024 की घटना तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें बीते 78 वर्षों में संभल में हुए बड़े दंगों, जनसंख्या में आए बदलाव और पलायन की विस्तृत तस्वीर भी सामने रखी गई है। आयोग ने चार दौर की जांच यात्राओं के दौरान सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज कर यह रिपोर्ट तैयार की।
जुमे की नमाज़ को लेकर हाई अलर्ट
रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने शुक्रवार की नमाज़ को लेकर पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। जिले में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में पैनी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।
संभल की जनसंख्या में बड़ा बदलाव
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आज़ादी के बाद से अब तक संभल के जनसांख्यिकीय बदलाव पर भी प्रकाश डाला है। बताया गया कि 1947 में यहां हिंदू आबादी करीब 45 प्रतिशत थी, जो अब घटकर मात्र 15 प्रतिशत रह गई है। आयोग ने पलायन की वजह लगातार होते दंगे, जबरन धर्मांतरण और संपत्तियों पर कब्जों को बताया है।
15 बड़े दंगों का ज़िक्र, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विवाद
रिपोर्ट में यह तथ्य भी दर्ज किया गया है कि अब तक संभल में 15 बड़े दंगे हो चुके हैं। 1978 के बाद हालात और अधिक बिगड़ने लगे। कई गवाहों ने आयोग को बताया कि जहां पहले शिव और हरिहर मंदिर हुआ करते थे, वहां आज मस्जिद खड़ी है। हिंदू कुएं और अन्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप बदलने के भी उदाहरण दिए गए हैं।
24 नवंबर 2024 की हिंसा का ज़िक्र करते हुए आयोग ने कहा कि शाही जामा मस्जिद में कोर्ट-निर्देशित सर्वे की जानकारी लीक होने के बाद भीड़ इकट्ठा हो गई। इसके बाद पथराव और गोलीबारी शुरू हो गई। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई, जबकि 29 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। जांच के दौरान पुलिस को मौके से विदेशी कारतूस भी मिले।
सांसद के बयान से बिगड़े हालात
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सांसद जियाउर्रहमान के भाषण को ठहराता है। 22 नवंबर 2024 को उन्होंने मस्जिद से कहा था – “हम इस देश के मालिक हैं, नौकर या गुलाम नहीं।” यह बयान समुदाय के भीतर ही मतभेद का कारण बना और थोड़ी ही देर में दो गुट आमने-सामने आ गए। विरोध बढ़ते-बढ़ते हिंसा में बदल गया और दोनों ओर से गोलीबारी तक हुई। परिणामस्वरूप चार लोगों की जान चली गई और शहर अशांति की आग में झुलस उठा।














