
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को इन नियमों को दोबारा तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा है कि संशोधन तक इन्हें लागू न किया जाए। इस फैसले के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मायावती ने न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के रुख पर अपनी बात रखी, बल्कि सवर्ण समाज को लेकर भी एक अहम सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया संतुलित कदम
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि यूजीसी द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों से समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। उन्होंने लिखा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का इन नियमों पर रोक लगाने का फैसला उचित है, क्योंकि इससे देश में सामाजिक तनाव का माहौल बनने से रोका जा सकता है।
सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की दी सलाह
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि यूजीसी इन नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेती, तो शायद यह विवाद खड़ा ही नहीं होता। मायावती का मानना है कि नियम बनाते समय जांच समितियों और अन्य प्रक्रियाओं में अपरकास्ट यानी सवर्ण समाज को भी नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत के तहत उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए था। उन्होंने संकेत दिया कि संतुलन और संवाद की कमी ही इस पूरे विवाद की जड़ बनी।
क्या है पूरा विवाद, जानिए पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इन प्रावधानों में केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के खिलाफ भेदभाव का उल्लेख है, जबकि सामान्य वर्ग के साथ होने वाले भेदभाव को इसमें शामिल नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अंतरिम रोक
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्षों में देश ने जातिरहित समाज की दिशा में काफी प्रगति की है और अब यह सवाल उठता है कि क्या हम फिर पीछे की ओर बढ़ रहे हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए 13 जनवरी को लागू किए गए इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी।
आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार और यूजीसी को नियमों का पुनर्मूल्यांकन कर नया ड्राफ्ट तैयार करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की चिंताओं को संतुलित तरीके से शामिल किया जा सके। वहीं, मायावती की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है, जहां सामाजिक न्याय के साथ-साथ सभी समुदायों को समान रूप से भरोसे में लेने की बात सामने आई है।














