
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि करने वाली पोस्ट के बाद सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर बरेली के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ा रुख अपनाया और अमेरिका तथा इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
मौलाना रजवी ने कहा, "ट्रंप ने पूरी दुनिया को विनाश की ओर धकेल दिया है। अमेरिका और इजराइल का यह दावा कि खामेनेई की हत्या कर दी गई है, पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। इन देशों का मकसद ईरानी जनता का मनोबल तोड़ना और भ्रम फैलाना है। लेकिन ईरान की जनता अपने सुप्रीम लीडर के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।"
उन्होंने आगे जोड़ा, "यह प्रचार ईरान में अस्थिरता फैलाने की साजिश है। वे चाहते हैं कि ईरान में तख्तापलट हो जाए। लेकिन इस झूठे और भ्रामक दावे से ईरानी लोगों का विश्वास डगमगाएगा, ऐसा नहीं है। ईरानी अवाम अपने नेता के साथ पूरी एकजुटता दिखा रही है।"
'ईरान की जनता जंग से नहीं डरती'
मौलाना रजवी ने ईरानी लोगों की वीरता और धैर्य पर जोर देते हुए कहा, "ईरान की अवाम ने इतिहास में कई जंगें झेली हैं और लड़ाई भी लड़ी है। वे मौत को शहादत मानते हैं और इसलिए उन्हें किसी भी खतरे या युद्ध से डर नहीं लगता। वहीं इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। वहां बम धमाके और मिसाइलों के बाद हाहाकार मचा हुआ है, हर नागरिक बंकरों में छिपा हुआ है।"
उन्होंने तेहरान का उदाहरण देते हुए कहा, "तेहरान में लोग सड़कों पर निकले हुए हैं। जब इजराइल पर मिसाइलें दागी जा रही थीं, वहां के बच्चे भी जश्न मना रहे थे और जनता अपने नेता के साथ खड़ी है।"
अमन और शांति की अपील
अपने बयान के अंत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा, "हमारी दुआ है कि युद्ध समाप्त हो और शांति कायम रहे। भारत के करोड़ों नागरिक भी यही चाहते हैं कि विश्व में अमन और सौहार्द स्थापित हो। हर तरफ संघर्ष के बजाय संवाद और समझौता हो, यही हमारी तमन्ना है।"














