
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की भारत सिटी सोसाइटी में हुई दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। टावर बी-1 की नौवीं मंजिल से तीन नाबालिग बहनों के कथित तौर पर कूदकर जान देने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय निवासी गहरे सदमे में हैं। हर कोई स्तब्ध है और मन में बस एक ही सवाल बार-बार उभर रहा है—आखिर तीनों बहनें एक साथ इतना कठोर फैसला कैसे कर सकती हैं?
मंगलवार रात इस घटना ने सोसाइटी की सामान्य रफ्तार थाम दी। यहां रहने वाली निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) अपने माता-पिता के साथ रहती थीं। बताया जा रहा है कि तीनों ने इमारत की नौवीं मंजिल से छलांग लगाई। हादसे के बाद से परिसर में मातम का माहौल है। पड़ोसियों का कहना है कि बच्चियां आमतौर पर बहुत कम लोगों से बातचीत करती थीं और उन्हें कॉम्प्लेक्स में शायद ही कभी देखा जाता था।
घटना की खबर फैलते ही टावर के पीछे बने पार्क में लोग जमा हो गए। हर बातचीत का केंद्र वही प्रश्न था—क्या ऐसा संभव है कि तीनों बहनें एक साथ यह कदम उठाएं? जवाब किसी के पास नहीं था, बस सन्नाटा और अविश्वास था। स्थानीय लोग अब भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
सोसाइटी में रहने वाली इशा त्यागी ने कहा, “यह घटना बेहद चौंकाने वाली है। किसी एक व्यक्ति के अवसाद में ऐसा कदम उठाने की बात तो समझ में आती है, लेकिन तीन बहनों का एक साथ ऐसा करना समझ से परे है।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कभी इन बच्चियों को स्कूल जाते या पार्क में अन्य बच्चों के साथ खेलते नहीं देखा। इशा के मुताबिक, यह हैरान करने वाली बात है कि उनका अकेलापन इतने लंबे समय तक किसी की नजर में नहीं आया।
बच्चियां घर से बहुत कम बाहर निकलती थीं—यह बात कई निवासियों ने दोहराई। समिति के संयुक्त सचिव राहुल कुमार झा ने बताया कि उन्होंने कभी-कभार लड़कियों को ट्यूशन जाते देखा था, लेकिन वे किस स्कूल में पढ़ती थीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। सुरक्षा गार्ड से सूचना मिलने के बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को अवगत कराया।
झा ने यह भी बताया कि परिवार पिछले करीब तीन वर्षों से सोसाइटी में रह रहा था, लेकिन उनका सामाजिक दायरा सीमित था। अधिकतर समय वे घर के भीतर ही रहते थे। पड़ोसियों के अनुसार, बच्चियों को बाहर खेलते या अन्य बच्चों से घुलते-मिलते शायद ही कभी देखा गया।
स्थानीय निवासी ज्योति कसाना ने बताया कि बाद में यह जानकारी सामने आई कि बहनों ने अपने कमरे की दीवारों पर कई कटआउट और संदेश चिपका रखे थे और वे अपना अधिकांश समय कमरे के अंदर ही बिताती थीं। उन्होंने कहा, “इस उम्र में बच्चे मानसिक रूप से बहुत संवेदनशील होते हैं। छोटी-छोटी बातें भी उनके मन पर गहरा असर डाल सकती हैं।”
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। सोसाइटी के उपाध्यक्ष अजय कसाना के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद से बच्चियां नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रही थीं। यह भी चर्चा थी कि वे पास के किसी कोचिंग सेंटर में पढ़ती थीं, हालांकि इसकी पुष्टि स्थानीय लोगों को नहीं थी। पुलिस ने सोसाइटी निवासियों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है।
पुलिस उपायुक्त (ट्रांस हिंडन) निमिष पाटिल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बहनों ने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया था और खिड़की के रास्ते बाहर निकलकर छलांग लगाई। फोरेंसिक टीम को कमरे की दीवारों पर लिखे कुछ वाक्य भी मिले हैं, जिनमें गहरे अकेलेपन की भावना झलकती है—जैसे ‘मैं बहुत बहुत अकेली हूं’ और ‘मेरी जिंदगी बहुत बहुत अकेली है’। पुलिस हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही है।














