
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटनाक्रम ने कई देशों में राजनीतिक और भावनात्मक बहस को जन्म दिया है। भारत में भी अलग-अलग संगठनों और समुदायों की ओर से विरोध और एकजुटता के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश से AIMIM नेता असीम वकार का बयान चर्चा में आ गया है।
असीम वकार ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि खामेनेई की मौत की खबर सुनने के बाद उनके मन में कई सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक, इस हमले के लिए केवल अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वे लोग भी कटघरे में हैं, जिन्होंने खुद को मुसलमान बताते हुए कथित तौर पर अपने संसाधन और ठिकाने उपलब्ध कराए।
‘सिर्फ ट्रंप और नेतन्याहू ही नहीं’
अपने बयान में असीम वकार ने कहा कि कुछ लोग ईरान को “सिर्फ एक शिया देश” बताकर इस मुद्दे को सांप्रदायिक नजरिये से देखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी नेता का विरोध सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह शिया था, तो क्या अमेरिका या इजरायल के नेताओं को सुन्नी माना जा सकता है? उनका कहना था कि यह तर्क न तो तार्किक है और न ही न्यायसंगत।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग खुद को मुसलमान कहते हुए भी अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े नजर आए, उन्हें अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। वकार ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर कोई समुदाय या व्यक्ति अपने ही धार्मिक पहचान के खिलाफ जाकर बाहरी ताकतों का समर्थन करता है, तो उससे जवाब मांगा जाना चाहिए।
‘दिल दुखी है, हमने बड़ा रहबर खोया’
असीम वकार ने अपने भावुक संदेश में कहा कि यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर भी गहरी पीड़ा का विषय है। उन्होंने खामेनेई को एक मजबूत और न झुकने वाला नेता बताते हुए कहा कि दुनिया ने एक बड़े रहनुमा को खो दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर देखें और सवाल पूछने से पीछे न हटें।
अपने बयान के अंत में उन्होंने खामेनेई के लिए दुआ करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें उच्च स्थान प्रदान करे और उनके समर्थकों को उनके रास्ते पर चलने की ताकत दे।
उल्लेखनीय है कि देश के कई हिस्सों में विभिन्न मुस्लिम संगठनों की ओर से खामेनेई की मौत और ईरान पर हुए हमलों के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि इस पूरे मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह घटनाक्रम केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सामाजिक विमर्श को भी प्रभावित कर रहा है।














