
जयपुर के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) में गुरुवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राजस्थान विज्ञान महोत्सव का भव्य उद्घाटन हुआ। तीन दिवसीय महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने ज्ञान, नवाचार और संस्कार को विकसित भारत 2047 की नींव बताया और कहा कि आने वाले समय में भारत की दिशा और दशा इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित होगी।
नारी केवल गृहणी नहीं, विज्ञान की ‘मास्टरमाइंड’
देवनानी ने महोत्सव की थीम “विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक” पर बोलते हुए नारी शक्ति की महत्वता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल सृजन की ही नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार की भी मूल शक्ति हैं। प्राचीन विदुषियों गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वेद और दर्शन के समय से ही महिलाएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वाहक रही हैं। आधुनिक भारत में कल्पना चावला और रितु करिधाल जैसी हस्तियां आज इसी परंपरा को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ा रही हैं।
विज्ञान को संस्कार और मानवता से जोड़ना जरूरी
देवनानी ने विज्ञान की एक नई परिभाषा पेश करते हुए कहा, “विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं का विषय नहीं, बल्कि यह समाज और मानवीय मूल्यों से जुड़ा दृष्टिकोण है।” उनका मानना है कि विज्ञान को जब तक संस्कार और मानवता से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने आह्वान किया कि विज्ञान का असली उद्देश्य मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान होना चाहिए।
विज्ञान को जिज्ञासा के रूप में विकसित करें
भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान की युवा प्रतिभाएं आज इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्टार्टअप के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रही हैं। देवनानी ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विज्ञान को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जिज्ञासा (Curiosity) के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि इससे बेटियां अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकेंगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने निष्कर्ष में कहा कि विकसित भारत 2047 के निर्माण में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी और महिला शक्ति को वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। उनका संदेश स्पष्ट था: बेटियों के दम पर भारत वैश्विक स्तर पर शिक्षा, विज्ञान और नवाचार में एक अग्रणी शक्ति बनेगा।














