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शुभेंदु-भूपेंद्र सिर्फ फ्रंटफुट पर, TMC में टूट की असली स्क्रिप्ट के पीछे आंध्र के BJP सांसद का नाम?

टीएमसी में कथित बगावत को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है, जहां आंध्र प्रदेश के बीजेपी सांसद सीएम रमेश पर पर्दे के पीछे बड़ी रणनीति चलाने के आरोप लग रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी और भूपेंद्र यादव जैसे नेताओं की भूमिका के बीच 22 सांसदों के कथित दलबदल की चर्चाएं पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा रही हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 13 Jun 2026 10:07:16

शुभेंदु-भूपेंद्र सिर्फ फ्रंटफुट पर, TMC में टूट की असली स्क्रिप्ट के पीछे आंध्र के BJP सांसद का नाम?

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित बगावत को लेकर जो राजनीतिक हलचल तेज हुई है, उसके पीछे एक नया और चौंकाने वाला नाम उभरकर सामने आया है। यह नाम है आंध्र प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 61 वर्षीय सांसद सीएम रमेश का। कभी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का हिस्सा रह चुके रमेश अब बीजेपी में रहकर उस रणनीति के केंद्र में बताए जा रहे हैं, जिसके जरिए टीएमसी के सांसदों को पार्टी बदलने के लिए साधा जा रहा है।

हालांकि इस पूरे कथित “ऑपरेशन” में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जैसे नामों को राजनीतिक स्तर पर आगे रखा जा रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे सबसे सक्रिय भूमिका सीएम रमेश की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, वही लगातार संपर्क साधने, फोन कॉल करने और सांसदों को मनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

“कुछ घंटों में किसी को भी मना सकता हूं” – रमेश का दावा

सीएम रमेश ने खुद भी अपने राजनीतिक अंदाज में इस तरह की कोशिशों में भूमिका की बात स्वीकार की है। उनका कहना है कि लोगों को संवाद के जरिए प्रभावित करना उनकी खास क्षमता है। एक बयान में उन्होंने कहा था, “मुझे कुछ घंटों का समय दीजिए, मैं किसी को भी समझाकर बीजेपी में शामिल कर सकता हूं।”

उनका यह भी दावा है कि उनकी मुलाकातें कई टीएमसी सांसदों से संसद परिसर में लंबे समय से होती रही हैं, जिससे आपसी परिचय और संपर्क मजबूत हुआ। संसद कैंटीन और राजनीतिक बैठकों के दौरान बने संबंधों को वह इस प्रक्रिया का आधार बताते हैं। इसी नेटवर्किंग का एक उदाहरण 2020 में भी सामने आया था, जब उनके पारिवारिक कार्यक्रम में कई राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हुए थे, जिनमें टीएमसी के कुछ नेता भी मौजूद रहे।

22 सांसदों के पाला बदलने को लेकर क्या हैं चर्चाएं?

टीएमसी के भीतर चल रही इस राजनीतिक हलचल पर पार्टी समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। आरोपों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर लगभग 22 सांसदों को बीजेपी के पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है।

इन दावों में कहा जा रहा है कि दो प्रमुख आश्वासनों के आधार पर यह राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश हो रही है—

पहला दावा: सांसदों के क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाओं और फंडिंग को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय असंतोष कम हो सके।
दूसरा दावा: उन्हें केंद्रीय एजेंसियों जैसे ED और स्थानीय जांच तंत्र से किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

हालांकि सीएम रमेश ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन या पद के लालच से जुड़ी नहीं है।

“बंगाल के केक में किशमिश डालने जैसा” – महुआ मोइत्रा का तंज

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सीएम रमेश को इस “बगावत” के केंद्र में जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कुछ लोग केवल चर्चा में बने रहने के लिए ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों से खुद को जोड़ते हैं। महुआ के अनुसार, यह पूरा मामला एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है, जिसमें कई स्तरों पर रणनीति काम कर रही है।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि कुछ लोग खुद को महत्वपूर्ण दिखाने के लिए “बनते हुए राजनीतिक केक में किशमिश डालने” की कोशिश करते हैं, जबकि वास्तविक तैयारी किसी और स्तर पर हो रही होती है।

पहले भी ऐसे राजनीतिक ऑपरेशन से जुड़ चुका है नाम

सीएम रमेश का यह पहला मामला नहीं है जब उनका नाम किसी बड़े राजनीतिक दलबदल या टूट की रणनीति से जोड़ा जा रहा हो। 2019 में आंध्र प्रदेश की राजनीति में टीडीपी और वाईएसआरसीपी के बीच सत्ता परिवर्तन के बाद भी उन पर इसी तरह की भूमिका निभाने के आरोप लगे थे।

उस समय भी टीडीपी के कई सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की घटनाएं सामने आई थीं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उस दौर में भी रमेश सक्रिय रूप से संपर्क साधने वाले नेताओं में शामिल थे।

इसके अलावा हाल के वर्षों में वे विभिन्न राजनीतिक बैठकों और क्लब इलेक्शंस जैसे मंचों पर भी सक्रिय दिखाई दिए, जहां उनकी मुलाकातें कई प्रभावशाली नेताओं से हुईं। बताया जाता है कि इसी नेटवर्किंग के जरिए वे विभिन्न दलों के सांसदों से संपर्क में रहे।

शुभेंदु अधिकारी की भूमिका पर भी चर्चा

हालांकि पर्दे के पीछे सीएम रमेश के नाम की चर्चा तेज है, लेकिन राजनीतिक समीकरणों में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत और भरोसा बनाने में उनकी भूमिका अहम रही है।

बताया जाता है कि कुछ हिचकिचाते सांसदों को मनाने के लिए व्यक्तिगत मुलाकातों और डिनर बैठकों का भी सहारा लिया गया। इन्हीं बैठकों के दौरान कई राजनीतिक बातचीत आगे बढ़ी और सहमति की दिशा में कदम बढ़े।

टीएमसी में अंदरूनी हलचल या बड़ी राजनीतिक रणनीति?

फिलहाल टीएमसी के भीतर कथित बगावत को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जिस तरह से अलग-अलग नाम और दावे सामने आ रहे हैं, उसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है। एक ओर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक रणनीतियों को लेकर चर्चाओं का बाजार भी तेज है।

अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह पूरा मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या वाकई किसी बड़े स्तर पर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिलता है या यह केवल सियासी बयानबाज़ी तक सीमित रहता है।

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