
'उदयपुर फाइल्स' फिल्म को लेकर दाखिल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 8 अगस्त तय की है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान आरोपी मोहम्मद जावेद की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपनी बात रखी, जबकि फिल्म निर्माता की ओर से वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट में दलीलें दीं।
यह फिल्म वर्ष 2022 में हुए कन्हैयालाल हत्या मामले पर आधारित बताई जा रही है। इसे लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी और हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि यह फिल्म मुस्लिम समाज की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली है और इसके माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर डाला जा सकता है।
निष्पक्ष सुनवाई में बाधा का दावा
सुनवाई के दौरान जावेद की ओर से पेश हुईं मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि अभी इस मामले में करीब 160 गवाहों की गवाही शेष है। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के वक्त उनके मुवक्किल की उम्र महज 19 वर्ष थी। उन्होंने यह दलील दी कि इस फिल्म के प्रसारण से आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का जो संवैधानिक अधिकार है, वह खतरे में पड़ सकता है।
फिल्म के संवाद और कथानक पर सवाल
वरिष्ठ वकील वरुण सिन्हा के अनुसार, गुरुस्वामी ने कोर्ट को अवगत कराया कि फिल्म निर्माता ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि फिल्म की पटकथा चार्जशीट के विवरण पर आधारित है और संवाद भी सीधे उसी से लिए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना अपने पुनरीक्षण अधिकारों का अनुचित उपयोग किया है।
केंद्र की भूमिका पर उठे प्रश्न
गुरुस्वामी ने अदालत में कहा, "वर्तमान कानून केंद्र सरकार को तीन प्रकार की पुनरीक्षण शक्तियाँ देता है—पहला, सरकार फिल्म के प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगा सकती है; दूसरा, वे प्रमाणपत्र में परिवर्तन कर सकते हैं; और तीसरा, वे फिल्म के प्रदर्शन को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकते हैं।" उन्होंने आगे जोड़ा, "लेकिन कानून में कहीं यह अधिकार नहीं दिया गया है कि सरकार फिल्म के संवादों को संपादित करे, कट्स सुझाए, या सेंसर बोर्ड द्वारा लगाए गए अस्वीकरणों में संशोधन करे।"
सेंसर बोर्ड को देना होगा जवाब
अब कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिया है कि वह 8 अगस्त की अगली सुनवाई में अदालत के सवालों का विस्तार से जवाब दे। यह देखा जाना बाकी है कि सेंसर बोर्ड और केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।














