
जयपुर: भजनलाल सरकार ने उन हजारों युवाओं को बड़ी राहत दी है जो सालों से राजस्थान एसआई भर्ती 2021 को लेकर असमंजस में थे। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस भर्ती को रद्द नहीं किया जाएगा, जिससे नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे उम्मीदवारों के चेहरे पर उम्मीद की रौशनी लौट आई है।
राज्य सरकार के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले के अंतिम निस्तारण की तारीख 7 जुलाई तय की है। यह फैसला जस्टिस समीर जैन ने याचिकाकर्ता कैलाश चंद शर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया।
सरकार ने कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट पेश की
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने सरकार की ओर से पक्ष रखा और बताया कि कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस भर्ती को अभी रद्द करना तर्कसंगत नहीं होगा। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि कुल 313 अभ्यर्थी पहली बार किसी सरकारी सेवा में चयनित हुए हैं, जिनमें से केवल 35 को दोषी पाया गया है।
भर्ती रद्द करने की कोई ठोस वजह नहीं
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुल 838 पदों में से सिर्फ 53 अभ्यर्थी दोषी पाए गए हैं। ऐसे में दोषियों को अलग कर देना ज्यादा व्यावहारिक होगा, बजाय इसके कि पूरे प्रोसेस को रद्द किया जाए। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री स्तर पर भी मंजूरी प्राप्त कर चुकी है।
सांख्यिकी विभाग की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्व की भर्तियों की तुलना में इस बार किसी विशेष क्षेत्र से असामान्य रूप से अधिक चयन नहीं हुआ है। यानी चयन प्रक्रिया संतुलित रही है।
भविष्य की भर्ती में राहत की तैयारी
सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि दोषी पाए गए अभ्यर्थियों को अगली भर्ती से अपात्र घोषित किया जाएगा। साथ ही भविष्य की भर्ती में अधिक पद जोड़े जाएंगे और आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
अभ्यर्थियों की ओर से कोर्ट में रखी गई बात
वहीं, सफल अभ्यर्थियों की ओर से सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने कहा कि कैबिनेट सब कमेटी के निर्णय के बाद यह याचिका अब बेमानी हो गई है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को खारिज कर दिया जाए, और अगर याचिकाकर्ता चाहें तो सब कमेटी के फैसले को एक नई याचिका के ज़रिए चुनौती दे सकते हैं।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के वकील आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार इस मसले को लगातार टालने की कोशिश कर रही है।
अब इस बहुप्रतीक्षित मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह फैसला हजारों युवाओं के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा।














