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राजस्थान में जर्जर स्कूलों पर सरकार का बड़ा एक्शन, डिप्टी सीएम बैरवा बोले- सभी भवन होंगे दुरुस्त

राजस्थान में जर्जर सरकारी स्कूलों को दुरुस्त करने की तैयारी है। सरकार ने मरम्मत के लिए 550 करोड़ और नए भवनों के लिए 450 करोड़ रुपये तय किए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 02 Sep 2026 4:28:01

राजस्थान में जर्जर स्कूलों पर सरकार का बड़ा एक्शन, डिप्टी सीएम बैरवा बोले- सभी भवन होंगे दुरुस्त

जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों के कमजोर और जर्जर बुनियादी ढांचे को लेकर राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर काम शुरू करने की बात कही है। उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बुधवार को कहा कि सरकार ने प्रदेशभर में ऐसे स्कूलों की पहचान कर ली है, जिनकी इमारतें क्षतिग्रस्त या असुरक्षित स्थिति में हैं। उनका कहना है कि जर्जर पाए गए सभी स्कूल भवनों को मजबूत किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक उन्हें बहाल किया जाएगा।

बैरवा के मुताबिक, स्कूलों की खराब स्थिति से जुड़ी समस्याओं पर सरकार पहले से काम कर रही थी। जिन स्थानों पर स्कूल भवन इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं थे, वहां छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की प्रक्रिया भी चल रही थी।

स्कूलों की इमारतों को लेकर सरकार ने क्या कहा?


उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कई स्कूल भवन काफी पुराने हैं और उनका निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था। इसलिए इस समस्या को केवल मौजूदा सरकार के कार्यकाल से जोड़ना सही नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे सभी स्कूलों की पहचान कर ली है और उनके लिए बजट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से भी इन मामलों की समीक्षा किए जाने की बात बैरवा ने कही। उनका कहना है कि जर्जर स्थिति में मौजूद स्कूलों को अब मजबूत और बहाल किया जाएगा।

बैरवा ने यह भी कहा कि पहले से ही समस्याग्रस्त स्कूलों की पहचान कर वहां वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए पढ़ाई संचालित करने का काम किया जा रहा था।

बागरू के सरकारी स्कूल को लेकर विवाद के बाद बढ़ी जांच

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर चर्चा उस घटना के बाद तेज हुई, जब जयपुर के पास बागरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की टीम पर हमला हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, टीम इस दावे की जांच करने गई थी कि संबंधित सरकारी स्कूल गौशाला से संचालित हो रहा है। बताया गया कि स्कूल की मूल इमारत को पिछले साल असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बंद कर दिया गया था। इसके बाद छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें एक अस्थायी बाड़े में स्थानांतरित किया गया था।

इस घटना के बीच प्रदेश के सरकारी स्कूलों की इमारतों और सुविधाओं को लेकर जांच का दायरा बढ़ा।

विधानसभा में सामने आया 611 स्कूलों का आंकड़ा

पिछले महीने राजस्थान सरकार ने विधानसभा में बताया था कि राज्य में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जो अपनी खुद की इमारत के बिना संचालित हो रहे हैं।

यह आंकड़ा सामने आने के बाद सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर फिर चर्चा शुरू हुई। विपक्ष की ओर से असुरक्षित स्कूल परिसरों की स्थिति पर चिंता जताई गई। इसके बाद सरकार ने स्कूल भवनों की मरम्मत, नवीनीकरण और नए निर्माण के लिए धन आवंटित करने की जानकारी दी।

मरम्मत के लिए 550 करोड़, नए भवनों पर 450 करोड़


राजस्थान सरकार के अनुसार, मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा ऐसे स्कूलों के लिए भवन निर्माण पर 450 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिनके पास फिलहाल अपनी इमारत नहीं है या जो जर्जर परिसरों में संचालित हो रहे हैं।

सरकार का कहना है कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए इन दोनों मदों के जरिए काम किया जाएगा।

पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का दावा

राज्य सरकार ने स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल 2,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की बात कही है। सरकार के अनुसार, पांच साल में यह राशि 12,500 करोड़ रुपये होगी।

भाजपा सरकार ने स्कूलों के मौजूदा बुनियादी ढांचे की कमियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, मौजूदा सरकार की ओर से जर्जर और बिना भवन वाले स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए बजट आवंटन और निर्माण कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा के बयान के अनुसार, प्रदेश में जिन स्कूलों की इमारतें जर्जर स्थिति में पाई गई हैं, उन्हें सुदृढ़ करने और बहाल करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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