
अजमेर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस को मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस (MMC) कहे जाने के बाद राजस्थान की राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को इसे प्रधानमंत्री की राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया। गहलोत का कहना है कि जिस पार्टी का आजादी की लड़ाई में नाखून भर भी योगदान नहीं रहा, वह कांग्रेस पर देश बांटने का आरोप लगा रही है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। उनका कहना है कि यह न केवल हास्यास्पद है बल्कि नैतिक रूप से भी असंगत है।
‘खुद को देश से बड़ा मत समझिए’
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पीएम को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि देश की आलोचना करना विरोध नहीं है। उन्होंने सरकार के मंच का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए करने पर चिंता जताई। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री को जनता के मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं है? राजस्थान की जनता को ‘राइट टू हेल्थ’ क्यों नहीं मिल रहा? गिग वर्कर्स और शहरी रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं पर केंद्र क्यों चुप है? उन्होंने कहा कि जनता उम्मीद कर रही थी कि पीएम इन जनहित के मामलों पर बोलेंगे, लेकिन वहां केवल राजनीतिक बयानबाजी हुई।
‘डबल इंजन’ बनकर रह गया ‘डबल जीरो’
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) पर भी गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि केवल योजना का नाम बदला गया, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता जानती है कि कैसे ‘डबल इंजन’ का वादा अब ‘डबल जीरो’ साबित हो रहा है। गहलोत ने मांग की कि विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी द्वारा दी गई गारंटी के अनुरूप, बंद योजनाओं को फिर से शुरू करने के निर्देश दिए जाएं।
राजस्थान के ‘सख्त कानून’ से सीखें
युवाओं को भ्रमित करने के बजाय कांग्रेस ने पीएम को नसीहत दी कि उन्हें राजस्थान के उस कड़े कानून की सराहना करनी चाहिए जिसमें उम्रकैद, 10 करोड़ का जुर्माना और संपत्ति कुर्की का प्रावधान है। कांग्रेस ने चुनौती दी कि अगर केंद्र गंभीर है, तो दिल्ली स्तर पर ऐसा कानून क्यों नहीं बनाया गया। गहलोत ने यह भी कहा कि भाजपा राजस्थान में अपने कार्यकाल के दौरान हुए ओएमआर शीट घोटाले की जांच कराने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही है।














