
राजधानी जयपुर की सड़कों पर हालात दिन-ब-दिन डरावने होते जा रहे हैं। शहर की व्यस्त गलियों और मुख्य मार्गों पर मानो मौत खुलेआम घूम रही हो। बीते एक महीने में सामने आए सड़क हादसों ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और तेज रफ्तार अब जानलेवा बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि घर से निकलते वक्त हर शख्स के मन में यह डर बैठ गया है कि पता नहीं अगला शिकार कौन होगा।
22 दिनों में सौ से ज्यादा हादसे, 24 जिंदगियां खत्म
राजस्थान की राजधानी जयपुर में पिछले 22 दिनों के भीतर करीब 100 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई परिवार अपने कमाऊ सदस्यों को खोकर टूट चुके हैं। सिर्फ बीते एक हफ्ते की बात करें तो चार अलग-अलग दुर्घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई। 18 जनवरी को गांधीनगर इलाके में चार साल की मासूम वियांशी तेज रफ्तार के चलते ऑटो से गिर गई और उसकी जान चली गई। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।
तेज रफ्तार बनी काल, एक के बाद एक दर्दनाक घटनाएं
20 जनवरी को करधनी एक्सप्रेस-वे पर एक तेज रफ्तार थार ने अनाया नाम की युवती को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अनाया एयरफोर्स में भर्ती की तैयारी कर रही थी और उसके सपने भी उसी सड़क पर दम तोड़ गए। इसके बाद 22 जनवरी को बनी पार्क इलाके में तेज रफ्तार कार ने पतासी का ठेला लगाने वाले हनुमान को कुचल दिया। 24 जनवरी को जयंती बाजार में डिलीवरी बॉय फैजान भी थार की चपेट में आ गया और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि शहर में बेलगाम रफ्तार किस कदर जानलेवा साबित हो रही है।
कानून की ढील, अपराधियों के हौसले बुलंद
विशेषज्ञों का मानना है कि इन हादसों की जड़ में तेज गति से वाहन चलाना, शराब के नशे में ड्राइविंग, ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अनदेखी और भारी वाहनों की लापरवाह चाल शामिल है। कई मामलों में हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में भारी परेशानी होती है। आरोप यह भी है कि पुलिस कई बार हल्की धाराओं में केस दर्ज कर देती है, जिसके चलते आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आ जाते हैं।
हाईकोर्ट के एडवोकेट बानो शर्मा का कहना है कि ऐसे मामलों में गैर-इरादतन हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज होना चाहिए, ताकि दोषी चालकों पर सख्त कार्रवाई की जा सके और एक मजबूत संदेश जाए।
डरे हुए शहरवासी, सख्त कार्रवाई की मांग
जयपुर के लोगों का कहना है कि अब सड़कों पर चलना जोखिम भरा हो गया है। कब, कहां और किस वाहन की चपेट में आ जाएं, कोई भरोसा नहीं रहा। नागरिकों ने सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सके और भविष्य में कोई भी चालक नियमों की अनदेखी करने की हिम्मत न करे।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो साल की शुरुआत में ही सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। ऐसे में यातायात और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। यदि समय रहते सख्त नियम और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में जयपुर की सड़कों पर हादसों का यह सिलसिला और भी भयावह रूप ले सकता है, जिसकी कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।














