
राजस्थान हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी आसाराम की अंतरिम जमानत को 9 जुलाई तक बढ़ा दिया है। यह फैसला न केवल कानूनी बहस का विषय बन गया है बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का कारण बना हुआ है। इससे पहले आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई तक अंतरिम जमानत दे रखी थी। फिलहाल आसाराम इलाज के लिए है अंतरिम जमानत पर बाहर है और यही वजह रही कि उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट से इस राहत को और आगे बढ़ाने की गुजारिश की। गुजरात हाईकोर्ट के अंतरिम ज़मानत के फैसले के बाद आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में अंतरिम ज़मानत को बढ़ाने की अर्जी डाली थी। उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।
6 महीने की जमानत मांगी थी
बताते चलें कि 86 साल के आसाराम ने 2013 के गांधीनगर दुष्कर्म केस में 6 महीने की स्थाई जमानत की मांग की थी। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी तबीयत लगातार चिंता का कारण बनी हुई है। हालांकि, गुजरात हाई कोर्ट ने फिलहाल सिर्फ 3 महीने की जमानत ही मंजूर की थी। इसके बाद आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट का रुख किया क्योंकि जोधपुर दुष्कर्म केस में भी वो दोषी करार दिए गए हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दोनों कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ही उन्हें इलाज के लिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ रवाना किया गया था।
आसाराम को क्या बीमारी है?
कोर्ट में पेश की गई जोधपुर AIIMS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को कोरोनरी आर्टरी डिजीज है, और वे "हाई रिस्क श्रेणी" में आते हैं। यह कोई सामान्य तकलीफ नहीं, बल्कि ऐसी हालत है जिसमें व्यक्ति को निरंतर मेडिकल निगरानी की जरूरत होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें विशेष नर्सिंग देखभाल, करीबी निगरानी और नियमित तौर पर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट व नेफ्रोलॉजिस्ट से काउंसलिंग की आवश्यकता है।
वकील ने कोर्ट में रखी स्वास्थ्य की गंभीर तस्वीर
आसाराम की वकील के मुताबिक, उनकी कई मेडिकल जांच कराई गई हैं और सभी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में एक बात समान रूप से सामने आई है — यह स्थिति वाकई में खतरनाक है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि आवेदक का स्वास्थ्य नाजुक है और ऐसे में इलाज के लिए विशेष देखभाल आवश्यक है। वकील ने न्यायालय से आग्रह किया कि मानवीय आधार पर राहत मिलनी चाहिए।














