
राजस्थान में भ्रष्टाचार का बोलबाला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आम जनता की मेहनत की कमाई से चलने वाले सिस्टम को खुद सरकारी कर्मचारी ही खोखला कर रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर लगातार शिकंजा कस रही है, जिससे आम लोगों में थोड़ी राहत की उम्मीद जरूर जगी है। हाल ही में एसीबी ने एक चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने पूरे झुंझुनूं जिले में हड़कंप मचा दिया।
इस बार एसीबी की टीम ने न सिर्फ एक, बल्कि दो पटवारियों को एक साथ घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़कर सबको चौंका दिया। आमतौर पर जिन सरकारी अधिकारियों पर लोगों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर रिश्वत की सौदेबाजी करें, तो आम जनता का भरोसा टूटना लाज़मी है।
रिश्वत की रकम ने खोली पोल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसीबी झुंझुनूं की टीम ने बुहाना तहसील के बड़बर हलके के पटवारी सुरेंद्र सिंह और गादली हलके के पटवारी धर्मपाल सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ धर दबोचा। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपनी पैतृक जमीन का सीमा ज्ञान करवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन इसके एवज में उसे 18 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई।
पहले तो पटवारी धर्मपाल सिंह ने 7,000 रुपये की रकम ले ली, और बाद में शेष 8,000 रुपये अपने साथी सुरेंद्र सिंह को देने के लिए कहा गया। पांच दिन पहले जब परिवादी बड़बर पटवारी सुरेंद्र सिंह से मिला, तो उसने 8 हजार की डिमांड कर दी। इसके बाद एसीबी टीम ने जाल बिछाकर आज बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
एक निजी कार्यालय बना ‘घूस का अड्डा’
कार्रवाई के वक्त दोनों पटवारी सुरेंद्र और धर्मपाल बड़बर में स्थित एक निजी कार्यालय में बैठे थे। एसीबी की टीम ने वहीं पर छापा मारा और दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। रिश्वत लेते इन अधिकारियों की गिरफ़्तारी से यह साफ हो गया कि भ्रष्टाचार अब सिर्फ बड़े पदों तक सीमित नहीं रहा, यह नीचे तक अपनी जड़ें जमा चुका है।
अदालत में होगा पेश, जांच जारी
एसीबी के एएसपी इस्माइल खान ने बताया कि दोनों अधिकारियों को कल झुंझुनूं स्थित एसीबी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। यह पूरी कार्रवाई जयपुर रेंज के डीआईजी अनिल कयाल के निर्देशन में की गई, जिसमें सीआई सुरेशचंद्र और उनकी टीम भी शामिल रही।
लगातार कार्रवाई से बढ़ रही उम्मीद
गौरतलब है कि झुंझुनूं एसीबी टीम ने पिछले 20 दिनों में अजमेर डिस्कॉम के एईएन और बाबू को भी रंगे हाथ पकड़ा था। पांच महीने पहले नवलगढ़ इलाके के गिरदावर और पटवारी के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था। अब पांच महीने के भीतर यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसमें दो भ्रष्ट पटवारी पकड़े गए हैं। इससे यह उम्मीद जगी है कि सिस्टम में सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है, बशर्ते कार्रवाई इसी तरह जारी रहे।














