
पंजाब की राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा हलचल देखने को मिली है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने बुधवार दोपहर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में वापसी की है। यह कदम पंजाब में बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि फुल्का की लोकप्रियता और साख ने उन्हें सिख समुदाय और राज्य के मतदाताओं के बीच खासा सम्मान दिलाया है।
दंगा पीड़ितों के लिए संघर्ष और सम्मान
एच.एस. फुल्का की पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा के रूप में है। दशकों तक उन्होंने पीड़ितों के पक्ष में आवाज उठाई और कानूनी मोर्चे पर उनकी मदद की, जिसके चलते पंजाब और सिख समाज में उनकी गहरी छवि और सम्मान स्थापित हुआ।
भाजपा में औपचारिक प्रवेश
फुल्का, जो पहले ढाका विधानसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं, ने दिल्ली में राष्ट्रीय राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।
एच.एस. फुल्का का राजनीतिक सफर
फुल्का ने 2014 में AAP के साथ राजनीतिक यात्रा शुरू की और लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से 19,709 वोटों से हार गए। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने ढाका निर्वाचन क्षेत्र से अकाली दल के मनप्रीत सिंह अयाली को हराकर जीत हासिल की और इसके बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
2015 के बेअदबी मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा कार्रवाई न करने के विरोध में उन्होंने 2018 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और बाद में AAP भी छोड़ दी। दिसंबर 2024 में फुल्का कुछ समय के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) से जुड़े, जब अकाल तख्त के निर्देश पर पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी।
अब भाजपा में शामिल होकर फुल्का ने अपने राजनीतिक करियर में एक नया अध्याय शुरू किया है। उनके आने से पंजाब में सियासी समीकरणों में बदलाव आने की संभावना है और बीजेपी को आगामी चुनावों में रणनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।













