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हिंदी थोपे जाने के खिलाफ एकजुट हुए ठाकरे बंधु, राज और उद्धव ने खोला भाजपा के खिलाफ मोर्चा

महाराष्ट्र में हिंदी भाषा थोपे जाने को लेकर राज और उद्धव ठाकरे एकजुट हुए हैं। दोनों नेताओं ने त्रिभाषा फार्मूले और भाजपा की भाषा नीति का विरोध किया। जानें पूरी खबर, कैसे बन रही है ठाकरे बंधुओं की नई रणनीति।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Fri, 27 Jun 2025 10:25:45

हिंदी थोपे जाने के खिलाफ एकजुट हुए ठाकरे बंधु, राज और उद्धव ने खोला भाजपा के खिलाफ मोर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बेहद दिलचस्प मोड़ सामने आया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में हिंदी 'थोपे जाने' को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भाषा के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया। इस मुद्दे पर अब उनका साथ उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी दिया है। उन्होंने भी त्रि-भाषा फार्मूले और हिंदी को 'थोपने' के सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध किया। यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है, जब इन दोनों ठाकरे बंधुओं के राजनीतिक रूप से एकजुट होने की अटकलें पहले से ही तेज़ थीं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पूर्व सहयोगी भाजपा, जो कि अब सत्ता में है, मुख्य रूप से मराठी भाषी राज्य में ‘‘भाषा आपातकाल’’ लगाने का प्रयास कर रही है। उनका यह बयान न सिर्फ भावनात्मक है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को लेकर गंभीर चिंता भी जाहिर करता है। ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हिंदी के विरोध में नहीं है, बल्कि इसे जबरदस्ती थोपे जाने के खिलाफ है।

मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा एक से पांचवीं तक के छात्रों को हिंदी पढ़ाने को लेकर उठे विवाद के बीच ठाकरे ने कहा, ‘‘हम किसी भाषा से नफरत नहीं करते, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम अपने बच्चों पर कोई भाषा थोपने की इजाजत देंगे। हम हिंदी थोपे जाने का विरोध करते हैं और यह विरोध अब और तेज़ होगा।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘भाजपा भाषा के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही है और एक तरह से राज्य में 'भाषा आपातकाल' लागू कर रही है।’’ ठाकरे का यह आरोप न सिर्फ एक राजनीतिक हमला है बल्कि एक भावनात्मक अपील भी है, जो राज्य के लोगों की मातृभाषा मराठी के सम्मान की रक्षा के लिए है।

उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से यह अपील की कि वे खुद घोषणा करें कि राज्य के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया जाएगा। ठाकरे ने याद दिलाया कि 2019 से 2022 तक अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में मराठी को अनिवार्य विषय बनाया था।

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पार्टी सात जुलाई को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में नागरिक समाज द्वारा आयोजित उस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेगी, जो स्कूलों में त्रि-भाषा फार्मूले और हिंदी थोपे जाने के खिलाफ होगा।

वहीं दूसरी ओर, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी एक संवाददाता सम्मेलन में इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी छह जुलाई को एक मार्च आयोजित करेगी। राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि यह विरोध प्रदर्शन किसी राजनीतिक दल के मंच से नहीं होगा, बल्कि इसमें आम नागरिकों, साहित्यकारों और कलाकारों को भी जोड़ा जाएगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे शिवसेना (UBT) के नेताओं को भी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वे सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि “महाराष्ट्र किसी भी राजनीतिक लड़ाई से बड़ा है”, जो दर्शाता है कि यह केवल एक राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक मुद्दा है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि हिंदी वैकल्पिक विषय है जबकि मराठी अनिवार्य रहेगी। राज्य सरकार ने बीते सप्ताह एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों को हिंदी सामान्यतः तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी। इसी आदेश के बाद यह विवाद शुरू हुआ।

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