
महाराष्ट्र की सभी 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और नतीजे भी सामने आ गए हैं। इस बार नगर निकाय चुनावों में भाजपा और शिवसेना गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए विपक्ष को बड़ा झटका दिया है। राज्य की सबसे ताकतवर और अहम मानी जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने स्पष्ट जीत दर्ज की है।
चुनाव परिणाम आने के बाद गुरुवार को मुंबई समेत राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं में मेयर पद के लिए आरक्षण तय करने की लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की गई। इस प्रक्रिया में यह साफ हो गया कि मुंबई बीएमसी में इस बार ओपन कैटेगरी से महिला मेयर चुनी जाएगी। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि आखिर मुंबई की अगली मेयर कौन होंगी।
मेयर पद की दौड़ में कौन-कौन?
मुंबई मेयर पद के लिए भाजपा की 6 महिला पार्षदों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर इन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है—
राजश्री शिरवडकर – सायन वार्ड से पार्षद, तीन बार निर्वाचित
अल्का केरकर – बांद्रा पश्चिम से पार्षद, तीन बार की नगरसेविका
हर्षिता नार्वेकर – फोर्ट वार्ड से पार्षद, दो बार चुनी गईं
प्रीति सीटम – गोरेगांव क्षेत्र से पार्षद, दूसरी बार जीत हासिल की
योगिता कोली – मालाड से पार्षद, दो बार नगर निगम में पहुंचीं
रितू तावडे – घाटकोपर से पार्षद, दो बार निर्वाचित
इन नामों में घाटकोपर की पार्षद रितू तावडे को लेकर कुछ अंदरूनी चर्चाएं भी चल रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने वर्ष 2012 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, जिस वजह से पार्टी के भीतर उनके नाम पर हल्का विरोध भी सामने आ सकता है।
कब तय होगा मुंबई का मेयर?
बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस जीत के साथ ही मुंबई महानगरपालिका से ठाकरे परिवार के करीब तीन दशक पुराने वर्चस्व का अंत हो गया है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस दौरे से लौटने के बाद मेयर पद को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बीएमसी का नंबर गेम समझिए
मुंबई बीएमसी चुनाव 15 जनवरी को कराए गए थे, जबकि मतगणना और नतीजे 16 जनवरी को घोषित हुए। 227 सीटों वाली इस नगर निगम में भाजपा ने 89 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना को 29 सीटें मिलीं।
वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें हासिल कीं और उसकी सहयोगी मनसे को 6 सीटें मिलीं। कांग्रेस के खाते में 24 सीटें आईं, AIMIM को 8 सीटें, समाजवादी पार्टी को 2 सीटें और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) को 1 सीट पर संतोष करना पड़ा।













