
मध्य प्रदेश में किसानों के हितों को लेकर सरकार ने एक अहम और राहत भरा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि अब 50 प्रतिशत तक कम चमक (लस्टर) वाले गेहूं की भी सरकारी खरीद की जाएगी। यह निर्णय उन किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिनकी फसल मौसम या अन्य कारणों से गुणवत्ता के मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाती थी। सरकार ने यह भी तय किया है कि पानी की कमी से कमजोर विकसित दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है, जबकि क्षतिग्रस्त दानों की स्वीकार्य सीमा में भी 6% की बढ़ोतरी की गई है। इन बदलावों का मकसद साफ है—किसानों की मेहनत का पूरा मूल्य सुनिश्चित करना और उनकी आमदनी को स्थिर बनाए रखना।
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी किसानों को राहत देने वाला बड़ा फैसला लिया है। अब किसानों को उनकी जमीन के बदले पहले से कहीं अधिक, यानी चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम न केवल किसानों के अधिकारों को मजबूत करेगा बल्कि उनके आर्थिक भविष्य को भी सुरक्षित बनाएगा। इसके साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी नई पहल की गई है। उड़द की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा और इसके ऊपर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। सोयाबीन के बाद अब सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने की घोषणा की गई है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे हैं।
2026: ‘किसान कल्याण वर्ष’ की दिशा में ठोस पहल
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है और इसी के तहत कई योजनाओं को तेज़ी से लागू किया जा रहा है। किसानों को महज 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन देने की योजना शुरू की गई है, जिससे सिंचाई सुविधाएं सुलभ हो सकें। साथ ही, सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को रात के बजाय दिन में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए। ‘कृषक मित्र योजना’ के तहत 90% तक सब्सिडी पर सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें और उनकी लागत भी कम हो।
उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण में सुधार
खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने पर्याप्त इंतजाम किए हैं। प्रदेश में फिलहाल 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि अन्य उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है। वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिससे किसानों को अब लंबी कतारों में खड़े हुए बिना अपनी सुविधा के अनुसार खाद मिल सके।
डेयरी सेक्टर से बढ़ेगी आय
किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार डेयरी सेक्टर को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है। मध्य प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में राज्य में रोजाना 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध का संग्रह हो रहा है। अब तक दुग्ध उत्पादक किसानों को 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है। दूध के दाम में भी 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना’ के तहत डेयरी यूनिट लगाने पर सामान्य वर्ग को 25% और एसटी/एससी वर्ग को 33% तक अनुदान दिया जा रहा है। 40 लाख रुपये की डेयरी परियोजना पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से मिल रही मजबूती
राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ के माध्यम से किसानों को सीधी आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की राशि तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। यह सहायता किसानों के दैनिक खर्च और खेती से जुड़े जरूरी निवेश में मददगार साबित हो रही है।
संक्षेप में समझें सरकार की प्रमुख पहलें:
गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया
उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन
स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई की गई, जरूरत पड़ने पर और विस्तार संभव
प्रदेश में कुल 3,516 उपार्जन केंद्र संचालित
8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई
3.96 लाख किसानों से 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद, 2,527 करोड़ रुपये का भुगतान
मध्यम और बड़े 40,457 किसानों ने 5.88 लाख मीट्रिक टन के स्लॉट बुक किए
किसानों को अब अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर फसल बेचने की सुविधा
कुल मिलाकर, राज्य सरकार के ये फैसले किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।














