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मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के 4 मामलों में पेंडिंग थे वारंट, 3 में हत्या का आरोप; पुलिस ने खोला राज

नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के चार मामलों में वारंट लंबित थे। तीन मामलों में हत्या की धारा 302 दर्ज थी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 19 Sep 2026 11:56:53

मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के 4 मामलों में पेंडिंग थे वारंट, 3 में हत्या का आरोप; पुलिस ने खोला राज

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद अब उनके खिलाफ लंबित पुराने मामलों और वारंट का विवरण सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित थे। उपलब्ध चार वारंट में से तीन ऐसे मामलों से जुड़े हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 यानी हत्या का आरोप दर्ज था।

चार वारंट में तीन मामलों में हत्या का आरोप

उपलब्ध केस विवरण के अनुसार नंदीग्राम पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन मामलों में IPC की धारा 302 शामिल थी। इनमें नंदीग्राम थाना केस नंबर 75/07, 221/07 और 188/07 शामिल हैं। चौथा मामला खेजुरी थाने में दर्ज केस नंबर 44/07 है, जिसमें हथियार कानून से जुड़ी धाराएं भी दर्ज थीं, लेकिन इसमें धारा 302 शामिल नहीं थी।

NDTV के अनुसार पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रधान के खिलाफ इन मामलों में वारंट लंबित थे और चार में से तीन वारंट उन मामलों से संबंधित थे जिनमें हत्या के आरोप शामिल हैं। रिपोर्ट में संबंधित मामलों की तारीखें भी दी गई हैं, जो अप्रैल, जुलाई, नवंबर और नवंबर 2007 की हैं।

2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हैं मामले

मिलन प्रधान का नाम 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े कई आपराधिक मामलों में आया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधान ने अपने चुनावी हलफनामे में 2007 से जुड़े 12 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था। इनमें चार हत्या के मामले बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये मामले हल्दिया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित हैं और किसी भी मामले में आरोप अभी तय नहीं हुए थे।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ हत्या की धारा में मामला दर्ज होना या गिरफ्तारी वारंट जारी होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में मिलन प्रधान को इन मामलों में दोषी ठहराए जाने की कोई जानकारी नहीं है।

चुनाव से पहले क्यों हुई गिरफ्तारी?

पुलिस कार्रवाई 18 सितंबर 2026 को हुई। इससे कुछ घंटे पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद पुलिस ने प्रधान को पुराने मामले में गिरफ्तार किया।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चुनाव के दौरान पुराने लंबित गिरफ्तारी वारंट की स्थिति की समीक्षा की जाती है। अधिकारी के अनुसार प्रधान के खिलाफ एक वारंट लंबित मिला था और उन्हें अदालत से कोई कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। पुलिस ने कहा कि कार्रवाई का उपचुनाव से संबंध नहीं था।

वहीं दूसरी रिपोर्टों में चार लंबित वारंट का विवरण सामने आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इन चार मामलों से जुड़े वारंट में तीन 2021 में और एक 2023 में जारी हुआ था।

गिरफ्तारी पर कांग्रेस और विपक्ष की आपत्ति

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी द्वारा प्रधान को समर्थन देने के कुछ ही समय बाद हुई गिरफ्तारी राजनीतिक रूप से प्रेरित है। राहुल गांधी ने भी गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

इसके जवाब में डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने मिलन प्रधान के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने तीन हत्या के मामलों के लंबित होने और वारंट के आधार पर पुलिस कार्रवाई की बात कही।

नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। नामांकन की प्रक्रिया के बीच मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने उनके चुनाव प्रचार और राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने वाला कानूनी घटनाक्रम पैदा किया है। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में किसी उम्मीदवार को दोषी साबित नहीं करती और चुनाव लड़ने की उनकी पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित चुनावी और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 से जुड़े पुराने मामलों में लंबित वारंट की कार्रवाई के तहत हुई है। चार उपलब्ध वारंट में तीन ऐसे मामलों से संबंधित बताए गए हैं जिनमें हत्या की धारा 302 दर्ज थी, जबकि चौथा मामला हथियार कानून से संबंधित धाराओं वाला है।

यह भी पढ़ें - नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर सायोनी घोष बोलीं- उनके खिलाफ मामले लंबित थे, चुनाव से पहले फैसले होते हैं

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