भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग का प्रमुख नहीं बनाए जाने की नाराजगी में भाजपा से इस्तीफा नहीं दिया। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के ‘मोजो स्टोरी’ पॉडकास्ट में उन्होंने इस्तीफे की तारीख और पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए इस अटकल को खारिज किया।
30 जुलाई को ही दे दिया था इस्तीफा
पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने अपना पहला इस्तीफा 30 जुलाई को पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया था। वहीं, भाजपा ने आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बदलाव की आधिकारिक घोषणा 17 अगस्त को दोपहर करीब 3 से 4 बजे की थी।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि 30 जुलाई को उन्हें कैसे पता हो सकता था कि 17 अगस्त को संगठन में क्या बदलाव होने वाले हैं और उस पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा। इस तरह उन्होंने आईटी सेल प्रमुख का पद नहीं मिलने को अपने इस्तीफे की वजह मानने वाली चर्चाओं को खारिज किया।
पूनावाला ने यह भी कहा कि वह पदों के पीछे नहीं भागते, बल्कि विजन, मिशन और महत्वाकांक्षा के लिए काम करते हैं।
आर्थिक और व्यक्तिगत कारणों का किया जिक्र
पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने बताया कि भाजपा छोड़ने के पीछे राजनीतिक पद से जुड़ी नाराजगी नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियां थीं। उन्होंने कहा कि राजनीति में रहते हुए उनके पास जीवनयापन और घर का किराया चुकाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे थे।
उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के प्रवक्ताओं को नियमित वेतन नहीं मिलता। कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए यात्रा भत्ता मिल सकता है, लेकिन निश्चित मासिक आय नहीं होती। इसी वजह से उन्होंने राजनीति से ब्रेक लेकर निजी क्षेत्र में दोबारा करियर शुरू करने का फैसला किया।
आईटी सेल की जिम्मेदारी में हुआ था बदलाव
भाजपा के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में अगस्त में बदलाव किया गया था। करीब 11 वर्षों तक आईटी सेल की अगुवाई करने वाले अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई। मालवीय ने भी सार्वजनिक रूप से म्हस्के को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी थीं।
इसी संगठनात्मक बदलाव के बाद यह चर्चा शुरू हुई थी कि क्या पूनावाला को अपेक्षित पद नहीं मिलने के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ी। हालांकि, पूनावाला ने इस्तीफे की तारीखों का हवाला देकर इस दावे को नकार दिया।
व्यक्तिगत आयकर खत्म करने की वकालत
पॉडकास्ट में पूनावाला ने अपने इस्तीफे के अलावा व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने ‘ऐक्स द टैक्स’ अभियान का जिक्र करते हुए व्यक्तिगत आयकर को समाप्त करने की वकालत की।
उनका दावा है कि व्यक्तिगत आयकर से सरकार को लगभग 14 से 15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जो सकल घरेलू उत्पाद का करीब 2.5 से 3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि आम वेतनभोगी और ईमानदार करदाता पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का बोझ पड़ता है।
पूनावाला के अनुसार, व्यक्तिगत आयकर हटाए जाने से लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा, जिससे बाजार में मांग बढ़ सकती है। यह उनकी व्यक्तिगत आर्थिक नीति संबंधी राय है, न कि सरकार की घोषित नीति।
फिलहाल, शहजाद पूनावाला ने भाजपा छोड़ने के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है। उन्होंने आईटी सेल प्रमुख का पद नहीं मिलने से जुड़ी अटकलों को अपनी इस्तीफे की वजह मानने से इनकार किया है।














