लगातार 22 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को अपना भूख हड़ताल समाप्त कर सकते हैं। फिलहाल वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं, जहां शनिवार को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल लेकर गई थी। इस कार्रवाई को लेकर काफी विवाद भी हुआ, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा। रविवार को उनकी पत्नी गीतांजली आंग्मो ने संकेत दिए थे कि जल्द ही अनशन समाप्त किया जा सकता है। अब कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के पहले से तय संसद मार्च से ठीक पहले सोनम वांगचुक ने अस्पताल से एक लिखित संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
अस्पताल से जारी संदेश में बताईं अनशन खत्म करने की शर्तें
सोनम वांगचुक ने कागज पर लिखे अपने संक्षिप्त संदेश में कहा कि कई लोग लगातार उनसे पूछ रहे हैं कि वह अपना अनशन कब समाप्त करेंगे। उन्होंने लिखा कि जैसा उन्होंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करेंगे, लेकिन इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पूरा होना जरूरी है।
उन्होंने अपनी पहली शर्त में कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई गंभीर विफलताओं, विशेष रूप से पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
WHEN WILL I END THE FAST….!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances… pic.twitter.com/kaOGx2Nk4T
दूसरी शर्त के तहत उन्होंने कहा कि यदि वह और CJP का नेतृत्व संसद तक पहुंचने में सफल होता है और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद एवं वरिष्ठ नेता उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाया जाएगा, तब भी वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार होंगे।
तीसरी शर्त में वांगचुक ने लिखा कि यदि उनकी बिगड़ती सेहत या किसी अन्य कारण से उनके लिए आगे अनशन जारी रखना संभव नहीं रहता, तब भी विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यदि इस मुद्दे को संसद में उठाने का स्पष्ट आश्वासन देते हैं, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।
19 जुलाई से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं सोनम वांगचुक
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 19 जुलाई से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अस्पताल में उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है और यह पूरी कार्रवाई गैरकानूनी नजरबंदी के समान है। वांगचुक का कहना है कि उनकी आवाजाही, लोगों से मिलने और स्वतंत्र रूप से बातचीत करने के अधिकार पर भी रोक लगा दी गई है।
शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल लेकर गई थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई विपक्षी दलों और उनके नेताओं ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। अब सभी की नजरें संसद मार्च और इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार या विभिन्न राजनीतिक दल सोनम वांगचुक की रखी गई शर्तों पर कोई ठोस आश्वासन देते हैं, जिसके बाद उनका 22 दिनों से जारी अनशन समाप्त हो सके।














