
आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा देकर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी में शामिल होते ही संगठन की कार्यसंस्कृति और अनुशासन से जुड़े अहम नियमों का परिचय कराया गया। यह मामला उस दिन का है जब उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और बातचीत के दौरान बार-बार उन्हें उनके नाम से संबोधित किया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि पिछले सप्ताह हुई इस मुलाकात के दौरान राघव चड्ढा ने बातचीत में कई बार ‘नितिन नवीन जी’ शब्द का प्रयोग किया। हालांकि, उनकी इस शैली पर वहां मौजूद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ की नजर पड़ी। बताया जाता है कि उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए राघव चड्ढा को विनम्रता से समझाया कि पार्टी की परंपरा के अनुसार पद को प्राथमिकता देते हुए ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहकर संबोधित करना अधिक उचित है।
संगठन में प्रोटोकॉल को लेकर पहले भी रहे हैं निर्देश
यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी में पदनाम और संबोधन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हों। इससे पहले भी जब नितिन नवीन पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, तब संगठन की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि पार्टी में पद की गरिमा सर्वोपरि है।
चूंकि नितिन नवीन उम्र और अनुभव के लिहाज से कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए शुरुआती दौर में कुछ नेता अनौपचारिक बातचीत में उन्हें नाम से पुकार देते थे। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी पदाधिकारियों और नेताओं को यह निर्देश दिया कि संगठनात्मक संवाद में अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है।
बीजेपी की संगठनात्मक संस्कृति और अनुशासन
पार्टी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि चाहे आपसी संबंध कितने भी पुराने या व्यक्तिगत क्यों न हों, आधिकारिक बातचीत में पद की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। सभी नेताओं को यह समझाया गया कि सम्मानजनक संबोधन संगठन की कार्यशैली का अहम हिस्सा है।
भाजपा का मानना है कि वह एक कैडर आधारित संगठन है, जहां व्यक्ति से ऊपर पद और पद से ऊपर संगठन को रखा जाता है। इसी वजह से यहां वरिष्ठ नेताओं और विशेष रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके व्यक्तिगत नाम के बजाय उनके पदनाम से संबोधित करने की परंपरा रही है।
यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि भारतीय जनसंघ के समय से चली आ रही संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा है, जिसे पार्टी आज भी अनुशासन और एकरूपता के रूप में आगे बढ़ा रही है।













