नई दिल्ली। जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी अबरार जमाल ने मदरसा शिक्षा में सुधार, समान नागरिक संहिता (UCC), जंतर-मंतर प्रदर्शन, संसद की कार्यवाही और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में मदरसों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वहां आधुनिक, रोजगारपरक और राष्ट्रहित से जुड़ी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग दोहराई।
मदरसों में आधुनिक शिक्षा के साथ राष्ट्रभावना पर दिया जोर
कारी अबरार जमाल ने कहा कि वर्तमान समय की जरूरत है कि मदरसों में धार्मिक अध्ययन के साथ विज्ञान, तकनीक, सामान्य ज्ञान, भाषाएं और अन्य आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाएं। उनका कहना था कि इससे वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी समाज और देश के विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल धार्मिक विद्वान तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे युवा भी तैयार होने चाहिए जो विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
पूरे देश में UCC लागू करने की मांग
समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर कारी अबरार जमाल ने कहा कि उनकी संस्था शुरू से इसका समर्थन करती रही है। उन्होंने उत्तराखंड में UCC लागू किए जाने का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी राज्य में इसे लागू करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं के कारण कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार UCC लागू होने से महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा मिलेगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक समान कानून लागू होना समय की आवश्यकता है।
तसलीमा नसरीन की टिप्पणी पर रखी अलग राय
मदरसों को बंद करने संबंधी लेखिका तसलीमा नसरीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कारी अबरार जमाल ने कहा कि वह इस विचार से सहमत नहीं हैं कि मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था लंबे समय से मांग करती रही है कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामान्य ज्ञान और आधुनिक विषयों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। उनका कहना था कि यदि कोई छात्र 10 से 15 वर्ष तक मदरसे में पढ़ाई करता है, तो उसके पास डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस या अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर भी होने चाहिए।
आतंकवाद के आरोपों को नकारा, राष्ट्रवाद पर दिया जोर
कारी अबरार जमाल ने कहा कि वह इस धारणा से सहमत नहीं हैं कि मदरसों में आतंकवाद सिखाया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिस दिन मदरसों में राष्ट्रगान की गूंज और देशभक्ति से जुड़े मूल्यों को व्यापक रूप से अपनाया जाएगा, उस दिन वहां से निकलने वाले विद्यार्थी अशफाक उल्ला खां, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और अन्य महान देशभक्तों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर दी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा मदरसों को आतंकवाद की फैक्ट्री बताए जाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कारी अबरार जमाल ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में मदरसों और उलेमाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ पहला फतवा मौलाना फजले हक खैराबादी ने जारी किया था और रेशमी रुमाल आंदोलन में भी मदरसों से जुड़े लोगों ने अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है और मदरसों को भी आधुनिक शिक्षा तथा तकनीक के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यदि वहां से अमन, भाईचारे और राष्ट्रभक्ति का संदेश जाएगा तो समाज और देश दोनों को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर कही यह बात
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ बच्चों द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले पर कारी अबरार जमाल ने कहा कि कानूनी कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा बच्चों को माफ करने का फैसला उनके बड़े दिल और लोकतांत्रिक सोच को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना सभी का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।
विदेशी प्रभाव और राजनीतिक माहौल पर भी जताई चिंता
कारी अबरार जमाल ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन विदेशी ताकतों के प्रभाव में देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी साक्ष्य का उल्लेख किए दावा किया कि कुछ समूहों को विदेशों से आर्थिक सहायता मिल रही है और वे देश में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी है। कारी अबरार के अनुसार लोकतंत्र में सरकार का विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर राष्ट्रहित के खिलाफ माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए।
संसद में लगातार हंगामे पर जताई चिंता
संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होने के मुद्दे पर कारी अबरार जमाल ने विपक्ष सहित सभी राजनीतिक दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और लगातार व्यवधान लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
उन्होंने कहा कि जनता सांसदों को अपने क्षेत्र और देश की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए चुनती है, न कि संसद को हंगामे या टकराव का मंच बनाने के लिए। उनका कहना था कि सदन का एक दिन भी सुचारु रूप से न चल पाना आर्थिक और लोकतांत्रिक दोनों दृष्टि से देश के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर संवाद और सहमति के साथ आगे बढ़ने की अपील की।














