उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को दलितों के प्रति भेदभाव और संवैधानिक समानता के सिद्धांत का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। पार्टी सांसदों ने उत्तराखंड सरकार की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस सांसदों का कहना है कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की घटना गंभीर है। उन्होंने इसे संविधान में निहित समानता के मूल्यों के विपरीत बताया और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की मांग की।
मल्लू रवि ने कार्रवाई की मांग की
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने हल्द्वानी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि देश में लंबे समय से संवैधानिक शासन होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं चिंता पैदा करती हैं। उनके मुताबिक, राज्यसभा में विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता के पद पर रहे मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ किया जाना गंभीर विषय है।
मल्लू रवि ने कहा कि यदि इस घटना को अंजाम देने वाले लोगों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने दोषियों को जेल भेजे जाने की मांग भी रखी।
राजीव शुक्ला ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और यदि उनकी सभा के बाद उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण’ कराया गया, तो यह बेहद अपमानजनक घटना है।
राजीव शुक्ला ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कुमारी शैलजा ने विचारधारा पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने इस घटना को भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर राष्ट्रवाद और तिरंगा यात्रा की बात होती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता की सभा के बाद कथित रूप से उसी जगह का ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
शैलजा ने कहा कि ऐसी घटना संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस तरह के ‘शुद्धिकरण’ का औचित्य क्या है। उनके अनुसार, यदि घटना के बाद कार्रवाई नहीं होती है तो इससे राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े होंगे।
संसद में भी सरकार और विपक्ष आमने-सामने
हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई जब संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहा। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार पर जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त जवाब नहीं देने का आरोप लगाया।
हुड्डा ने महंगाई, बेरोजगारी, छात्रों के खिलाफ कार्रवाई, NEET पेपर लीक, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था, E20 ईंधन तथा हरियाणा में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित करने से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन विषयों को संसद में उठाने के लिए आया था और यदि सदन में जनता से जुड़े सवालों पर चर्चा नहीं होगी, तो विपक्ष उन्हें कहां उठाएगा।
विपक्ष ने चर्चा का अवसर नहीं मिलने का लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने भी सरकार पर विपक्ष को पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को सदन में बोलने के अवसर मिलते रहे, जबकि गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर उन्होंने सवाल उठाए।
उन्होंने छात्रों, आम लोगों और कथित डोनेशन घोटाले से प्रभावित लोगों की ओर से माफी मांगने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि जंतर-मंतर की घटनाओं को लेकर संसद के भीतर जवाब और माफी की मांग की जानी चाहिए।
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों, फंड से जुड़े आरोपों, लोगों की आस्था और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई जैसे विषयों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उनके मुताबिक, सरकार चर्चा से बच रही है, जबकि सदन को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है।













