दिशा सालियन की मौत के मामले में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। दिशा के पिता सतीश सालियन ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी (एसपी) नेता तथा महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं के बयानों के जरिए उनकी बेटी की मौत की जांच की मांग को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की गई, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
नोटिस में दोनों नेताओं से सात दिनों के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और कथित रूप से गलत व मानहानिकारक बयानों को वापस लेने की मांग की गई है। सतीश सालियन ने यह भी मांग रखी है कि माफी प्रमुख प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित की जाए। इसके अलावा दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर कम से कम तीन मिनट का वीडियो माफीनामा पोस्ट करने की मांग की गई है।
किन बयानों पर भेजा गया नोटिस
कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे के उन कथित बयानों का हवाला दिया गया है, जिनमें सतीश सालियन की न्याय की मांग की मंशा पर सवाल उठाने और मामले को उन्हें परेशान करने के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि ठाकरे ने दावा किया था कि सीबीआई पहले ही दिशा सालियन मामले की जांच कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। सतीश सालियन की ओर से इन दावों को गलत और मानहानिकारक बताया गया है।
नोटिस में अनिल देशमुख के 23 मार्च 2025 के कथित बयान का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, देशमुख ने दिशा सालियन मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था। सतीश सालियन का आरोप है कि इस तरह के बयानों से उनकी न्याय की मांग को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हुई और उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
CBI की जांच से जुड़ा ताजा घटनाक्रम
यह कानूनी नोटिस ऐसे समय आया है जब दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई ने नई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। यह कार्रवाई 2 सितंबर 2026 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई ने 13 सितंबर को मामला दर्ज किया और जांच में दिशा सालियन की मौत से जुड़े आरोपों तथा कथित आपराधिक साजिश और सबूतों से छेड़छाड़ समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
सीबीआई की एफआईआर में आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों के नाम जांच के दायरे में आने वाले व्यक्तियों के तौर पर बताए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में सीबीआई अधिकारियों के हवाले से स्पष्ट किया गया है कि इस चरण में किसी व्यक्ति को आरोपी घोषित नहीं किया गया है और जांच के दौरान भूमिका सामने आने के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इसलिए आदित्य ठाकरे का नाम एफआईआर में होना अपने आप में दोष सिद्ध होने या आरोपी ठहराए जाने के बराबर नहीं है।
आदित्य ठाकरे ने क्या कहा
सीबीआई की एफआईआर में अपना नाम आने के बाद आदित्य ठाकरे ने 16 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिशा सालियन को जानने या उनसे मिलने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी दिशा सालियन से मुलाकात नहीं की और न ही उनका उनसे परिचय था। उन्होंने अपने खिलाफ लगातार लगाए जा रहे आरोपों को बिना सबूत का प्रयास बताया और कहा कि इस मामले में उनका नाम जोड़ने की कोशिश पिछले कई वर्षों से की जा रही है।
ठाकरे ने यह भी कहा कि मामले की आधिकारिक दोबारा जांच बिना राजनीतिक या अन्य प्रकार के हस्तक्षेप के आगे बढ़नी चाहिए। उनका यह बयान सतीश सालियन की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के कानूनी नोटिस के बीच सामने आया है।
अब कानूनी स्थिति क्या है
फिलहाल सतीश सालियन की ओर से 500 करोड़ रुपये के हर्जाने और सार्वजनिक माफी की मांग वाला कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में सात दिनों की समयसीमा दी गई है। नोटिस के अनुसार, मांगें पूरी नहीं होने पर सिविल मानहानि के मुकदमे के साथ आपराधिक मानहानि की कार्रवाई का रास्ता अपनाने की बात कही गई है।
दिशा सालियन की मौत के मामले में सीबीआई की जांच अलग कानूनी प्रक्रिया है। इसमें अभी जांच जारी है और एफआईआर में जिन लोगों की भूमिका जांच के लिए दर्ज की गई है, उनके खिलाफ अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।













