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मछली खाते हैं तो जान लें कौन सी किस्म सेहत के लिए सबसे अच्छी, डाइट में जरूर करें शामिल

मछली खाने वालों को सैल्मन, सार्डिन, ट्राउट और टूना की किस्मों के पोषण लाभ, ओमेगा-3 और मर्करी से जुड़ी जरूरी बातें जाननी चाहिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 17 Sep 2026 4:09:20

मछली खाते हैं तो जान लें कौन सी किस्म सेहत के लिए सबसे अच्छी, डाइट में जरूर करें शामिल

मछली को प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, सभी मछलियों का पोषण मूल्य और उनमें मौजूद मर्करी का स्तर एक जैसा नहीं होता। इसलिए डाइट में मछली शामिल करते समय केवल स्वाद या उपलब्धता के आधार पर चुनाव करने के बजाय उसकी किस्म और पकाने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और खाद्य एवं कृषि संगठन की विशेषज्ञ समीक्षा के अनुसार, मछली का सेवन शरीर को प्रोटीन और कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है। इसके फायदे व्यक्ति की उम्र, खानपान, मछली की किस्म और सेवन की मात्रा के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

1. सैल्मन में मिलता है ओमेगा-3

सैल्मन ऐसी मछलियों में शामिल है, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। ओमेगा-3 में EPA और DHA जैसे फैटी एसिड शामिल हैं, जो शरीर के सामान्य कार्यों और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अनुसार, सैल्मन, सार्डिन, हेरिंग और ट्राउट ओमेगा-3 के स्रोत हो सकते हैं। सैल्मन को आमतौर पर कम मर्करी वाली मछलियों में भी शामिल किया जाता है।

2. सार्डिन और एंकोवी भी हो सकती हैं उपयोगी


सार्डिन और एंकोवी छोटी मछलियों की श्रेणी में आती हैं और इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। सार्डिन को उनकी खाद्य हड्डियों के कारण कैल्शियम का स्रोत भी माना जा सकता है।

हालांकि, डिब्बाबंद मछली खरीदते समय लेबल पर सोडियम की मात्रा देखना जरूरी है। अधिक नमक वाले उत्पादों का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें अपने सोडियम सेवन पर ध्यान देना पड़ता है।

3. ट्राउट में प्रोटीन और ओमेगा-3


ट्राउट भी पोषण की दृष्टि से उपयोगी मछली मानी जाती है। इसमें प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड मिल सकते हैं। FDA की मछली संबंधी गाइडलाइन में फ्रेशवॉटर ट्राउट को कम मर्करी वाली ‘बेस्ट चॉइस’ श्रेणी में रखा गया है।

मछली चुनते समय उसके स्रोत और स्थानीय खाद्य सुरक्षा संबंधी सलाह को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि एक ही नाम वाली मछली में मर्करी का स्तर प्रजाति और स्थान के अनुसार बदल सकता है।

4. मैकेरल चुनते समय किस्म जरूर देखें

मैकेरल में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जा सकता है, लेकिन मैकेरल की हर किस्म को एक जैसा नहीं माना जा सकता। FDA की सूची में अटलांटिक मैकेरल और पैसिफिक चब मैकेरल को कम मर्करी वाली मछलियों में रखा गया है, जबकि किंग मैकेरल को अधिक मर्करी वाली मछलियों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

इसलिए बाजार में मैकेरल खरीदते समय उसकी सटीक किस्म की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। केवल ‘मैकेरल’ नाम देखकर सभी प्रकारों को समान मानना सही नहीं होगा।

5. टूना की हर किस्म एक जैसी नहीं होती


टूना मछली की अलग-अलग प्रजातियों में मर्करी का स्तर अलग हो सकता है। FDA के अनुसार, कैन्ड लाइट टूना को कम मर्करी वाली ‘बेस्ट चॉइस’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि अल्बाकोर या व्हाइट टूना और येलोफिन टूना को ‘गुड चॉइस’ श्रेणी में शामिल किया गया है।

वहीं, बिगआई टूना को अधिक मर्करी वाली मछलियों की सूची में रखा गया है। इसलिए टूना खाते समय पैकेट या उत्पाद के लेबल पर उसकी किस्म की जानकारी देखना उपयोगी है।

6. बड़ी शिकारी मछलियों में मर्करी का ध्यान रखें

कुछ बड़ी और लंबे समय तक जीवित रहने वाली शिकारी मछलियों में मर्करी का स्तर अधिक हो सकता है। FDA की सलाह में किंग मैकेरल, शार्क, स्वॉर्डफिश, मार्लिन, ऑरेंज रफी और बिगआई टूना जैसी मछलियों को अधिक मर्करी वाली श्रेणी में रखा गया है।

मर्करी की अधिक मात्रा लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए मछली का चुनाव करते समय मर्करी संबंधी सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

7. मछली पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है


मछली के पोषण लाभों के साथ-साथ उसे तैयार करने का तरीका भी डाइट की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। बहुत ज्यादा तेल में तलने के बजाय भाप में पकाना, बेक करना या ग्रिल करना जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।

मछली चुनना ही पर्याप्त नहीं है। भोजन में इस्तेमाल होने वाले तेल, नमक और अन्य सामग्री की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। डिब्बाबंद या प्रोसेस्ड मछली खरीदते समय सोडियम और अन्य सामग्री की जानकारी लेबल पर पढ़ना उपयोगी रहेगा।

मछली खाते समय इन बातों का रखें ध्यान


मछली को पूरी तरह डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और FAO की समीक्षा में मछली से मिलने वाले पोषक तत्वों और संभावित जोखिमों, दोनों का मूल्यांकन किया गया है। सही चुनाव के लिए मछली की किस्म, मर्करी का स्तर, सेवन की मात्रा और व्यक्ति की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सामान्य वयस्कों के लिए सप्ताह में दो बार मछली खाने की सलाह देता है, विशेष रूप से ओमेगा-3 वाली मछलियों को आहार में शामिल करने पर जोर देता है। हालांकि, गर्भावस्था, स्तनपान, बच्चों या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में मछली के चुनाव और मात्रा के लिए संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

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