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राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस बीकानेर में मजबूत; गहलोत के गढ़ जोधपुर में टाई

राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी 4,179 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस को बीकानेर में बहुमत मिला, जबकि जोधपुर में दोनों दल 44-44 पर रहे।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 15 Sep 2026 8:22:57

राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, कांग्रेस बीकानेर में मजबूत; गहलोत के गढ़ जोधपुर में टाई

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 14 सितंबर को हुई मतगणना में बीजेपी ने कांग्रेस से अधिक वार्डों पर जीत दर्ज की। हालांकि, नतीजों में कांग्रेस ने भी कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि जोधपुर में बीजेपी और कांग्रेस बराबरी पर रहीं।

राज्य निर्वाचन आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 10,244 वार्डों में से 10,235 के परिणाम घोषित होने तक बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते थे। कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की। इस तरह निर्दलीय प्रत्याशी भी कई निकायों में बोर्ड गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थिति में पहुंच गए हैं।

चार नगर निगमों में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत

10 नगर निगमों के नतीजों में बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 150 में से 78 सीटें जीतीं। उदयपुर में पार्टी को 80 में से 53, भीलवाड़ा में 70 में से 45 और कोटा में 100 में से 53 सीटें मिलीं।

अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। वहीं, बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। अजमेर और पाली में भी कांग्रेस मजबूत स्थिति में रही।

गहलोत के गढ़ जोधपुर में बीजेपी-कांग्रेस बराबर

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक आधार माने जाने वाले जोधपुर में तस्वीर बीजेपी के लिए पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। जोधपुर नगर निगम की 100 सीटों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीते। बाकी 10 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं। ऐसे में यहां किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और निर्दलीय पार्षद महत्वपूर्ण हो गए हैं।

भरतपुर में निर्दलीयों ने बदला समीकरण

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में भी बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भरतपुर नगर निगम की 65 सीटों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। निर्दलीय यहां अपने दम पर बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गए।

जोधपुर के अलावा कई अन्य निकायों में भी निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या इतनी रही कि बोर्ड गठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि राज्यभर में बीजेपी के कुल वार्ड प्रदर्शन के बावजूद हर निकाय में सत्ता का फैसला केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले से नहीं हुआ है।

वसुंधरा राजे के गढ़ में कांग्रेस की सेंध

नतीजों में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में कांग्रेस की जीत भी बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण झटका रही। वहीं बारां में आम आदमी पार्टी ने अपना पहला नगर निकाय नियंत्रण हासिल किया। इन नतीजों ने बीजेपी के कुछ पारंपरिक मजबूत इलाकों में भी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया।

बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चुनाव परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार के कामकाज में जनता के भरोसे से जोड़ते हुए इसे सरकार के अब तक के कार्यकाल का समर्थन बताया।

वहीं राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव में पूरी ताकत लगाने के बावजूद अपेक्षित जनादेश हासिल नहीं किया। कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन को लेकर बीजेपी की बढ़त के अलग राजनीतिक मायने बताए हैं।

निकाय चुनाव के ये नतीजे 309 शहरी स्थानीय निकायों में आए हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं। मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में कराया गया था।

कुछ निकायों में ईवीएम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण परिणाम प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है। पुनर्मतदान 16 सितंबर को होगा और उसकी मतगणना 17 सितंबर को निर्धारित की गई है।

यह भी पढ़ें - राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की बड़ी बढ़त, कांग्रेस पीछे; नतीजों के बाद दिल्ली बुलाए गए CM भजनलाल शर्मा

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