
भारत में डिजिटल हाईवे सिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुंबई–दिल्ली नेशनल हाईवे (NH48) पर सूरत के पास देश का पहला पूरी तरह बैरियर-लेस टोल प्लाजा शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत वाहन अब टोल बूथ पर रुके बिना सीधे आगे बढ़ सकेंगे, जिससे यात्रा पहले से कहीं ज्यादा स्मूद और तेज हो जाएगी।
यह आधुनिक टोल सिस्टम ‘चोर्यासी टोल प्लाजा’ पर लागू किया गया है, जो सूरत और भरूच के बीच कामरेज–चोर्यासी क्षेत्र में स्थित है। करीब दो महीने तक चली सफल टेस्टिंग (2 फरवरी से) के बाद इसे आम यात्रियों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। खास बात यह है कि यहां किसी तरह का फिजिकल बैरियर मौजूद नहीं है, जिससे ट्रैफिक बिना किसी बाधा के लगातार आगे बढ़ता रहता है।
देश में पहली बार लागू हुआ फुल ऑटोमैटिक फ्री फ्लो सिस्टम
यह नई टोल व्यवस्था मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की योजना के तहत लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह आधुनिक और तकनीक आधारित बनाना है।
सरकार की योजना है कि 2026 के अंत तक देशभर के 1,050 से अधिक टोल प्लाजा को इसी AI-संचालित और बैरियर-फ्री मॉडल में बदला जाए। इस सिस्टम में टोल शुल्क अपने-आप कट जाता है, जिसमें ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag तकनीक दोनों का उपयोग किया जाता है। वाहन जैसे ही टोल जोन से गुजरता है, वैसे ही भुगतान प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
ट्रैफिक जाम में कमी और ईंधन की बचत की उम्मीद
सरकार का मानना है कि इस तकनीक से हाईवे पर लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी और यात्रा समय भी काफी घट जाएगा। साथ ही, वाहनों के लगातार रुकने-चलने से होने वाली ईंधन की खपत में भी बचत होगी, जिससे प्रदूषण स्तर पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
इसके अलावा, टोल वसूली प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप कम होने से सिस्टम अधिक पारदर्शी और तेज बनेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि यह पहल नागरिकों के लिए Ease of Living को बेहतर बनाएगी और देश में Ease of Doing Business को भी नई मजबूती देगी। इससे लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई सेक्टर को भी तेज गति मिलेगी।
उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार वर्ल्ड-क्लास और तकनीक आधारित नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
कैसे काम करता है यह स्मार्ट टोल सिस्टम
इस सिस्टम में हाईवे पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं, जबकि RFID सेंसर FASTag की जानकारी को तुरंत पढ़ लेते हैं। इसके बाद टोल शुल्क सीधे वाहन मालिक के बैंक खाते से ऑटोमैटिक कट जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी मानव हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती। NHAI के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ए.आर. चित्रांशी ने बताया कि इस तकनीक में वाहन को टोल पर रोकने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने समझाते हुए कहा, “इसे मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग कहा जाता है, जिसमें कोई बैरियर नहीं होता। वाहन ऊपर लगे गैन्ट्री स्ट्रक्चर के नीचे से गुजरता है और उसी समय सिस्टम अपने-आप टोल वसूल लेता है।”













