
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर चलती बस में हुई दिल दहला देने वाली आपराधिक घटना से सहम गई है। इस मामले को लेकर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य कृत्य में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उस बस को भी अपने कब्जे में ले लिया है, जिसमें यह वारदात अंजाम दी गई थी। जानकारी के अनुसार यह स्लीपर बस बिहार में रजिस्टर्ड है और दिल्ली–बिहार रूट पर संचालित होती है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस का नंबर BR 28P 3941 है और यह ‘रॉयल ट्रैवल्स एंड कार्गो’ नामक ट्रांसपोर्ट कंपनी के अंतर्गत चलती है। नारंगी और काले रंग की यह स्लीपर बस दिल्ली के रानी बाग इलाके में घटना के दौरान मौजूद थी। पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस समय बस में और कौन-कौन लोग सवार थे। इसके साथ ही बस के दस्तावेज, फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट की भी विस्तृत जांच की जा रही है। रानी बाग थाने में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस ने पुष्टि की है कि आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है और जांच आगे बढ़ रही है।
पर्दों वाली बस में अंजाम दी गई वारदात, फोरेंसिक टीम मौके पर
जांच के शुरुआती चरण में यह बात भी सामने आई है कि बस के भीतर खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे, जिससे बाहर से अंदर का दृश्य पूरी तरह ढका हुआ था। एसी बस होने के कारण दरवाजे और खिड़कियां भी बंद थीं, जिससे न तो किसी तरह की आवाज बाहर निकल पाई और न ही आसपास मौजूद लोगों को किसी अनहोनी का अंदेशा हो सका। इसी वजह से पूरी वारदात लंबे समय तक किसी की नजर में नहीं आ पाई।
घटना स्थल से सबूत जुटाने के लिए फोरेंसिक साइंस टीम को मौके पर बुलाया गया है, जो बस के अंदरूनी हिस्सों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि घटनाक्रम को समझने और साक्ष्य एकत्र करने में यह जांच अहम भूमिका निभाएगी।
2 घंटे तक चलती बस की गई वारदात, सड़क किनारे गंभीरहालत में छोड़ा
पीड़िता पीतमपुरा क्षेत्र की रहने वाली है और मंगोलपुरी स्थित एक फैक्ट्री में काम करती है। रोज की तरह वह सोमवार रात की शिफ्ट खत्म करने के बाद घर लौट रही थी। वह सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टॉप तक पैदल पहुंची, जहां एक स्लीपर बस पहले से खड़ी थी। जब उसने बस के पास खड़े एक व्यक्ति से समय पूछा, तो आरोपियों ने उसे बातों में उलझाने के बजाय जबरन बस के अंदर खींच लिया।
बस में घसीटने के बाद दरवाजा बंद कर दिया गया और वाहन तुरंत चल पड़ा। इसके बाद पीड़िता के साथ भयावह घटना की शुरुआत हुई। पीड़िता के अनुसार, दो आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान बस को लगभग दो घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर घुमाया जाता रहा और करीब 7 किलोमीटर तक का सफर तय किया गया, जो नांगलोई मेट्रो स्टेशन के पास समाप्त हुआ। अंत में आरोपियों ने गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ अवस्था में पीड़िता को रात लगभग 2 बजे सड़क किनारे फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।
तीन बच्चों की मां पीड़िता, आर्थिक मजबूरी में अस्पताल में भर्ती से इनकार
घटना के बाद किसी तरह खुद को संभालते हुए पीड़िता ने पुलिस को सूचना दी। पहली कॉल नांगलोई पुलिस स्टेशन में की गई, लेकिन चूंकि घटना रानी बाग थाना क्षेत्र में आती थी, इसलिए मामला तुरंत वहां ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद एक महिला सब-इंस्पेक्टर पीड़िता को बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल ले गईं, जहां मेडिकल जांच में सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन पीड़िता ने भर्ती होने से इनकार कर दिया। उसने बताया कि उसका पति टीबी से पीड़ित है और घर पर ही रहता है। दंपति की तीन बेटियां हैं, जिनकी उम्र 8, 6 और 4 साल है। आर्थिक तंगी के चलते वह यह सोचकर अस्पताल में रुकने को तैयार नहीं हुई कि अगर वह भर्ती हो गई तो बच्चों की देखभाल और उनके भोजन की व्यवस्था कौन करेगा। इसी मजबूरी के कारण वह गंभीर चोटों के बावजूद घर लौटकर इलाज कराने को मजबूर हो गई।













