
दिल्ली सरकार ने सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और समयपालन सुनिश्चित करने के लिए एक अहम और सख्त कदम उठाया है। अब राजधानी के सभी सरकारी कार्यालयों में हर कर्मचारी के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। यह नियम छोटे स्तर के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी पर समान रूप से लागू होगा।
यह निर्णय उस समय लिया गया जब हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जीएसटी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी समय पर कार्यालय में मौजूद नहीं पाए गए, जिससे सरकार ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया।
अब सभी दफ्तरों में लागू होगा सामान्य कार्य समय
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) के सभी कार्यालय अब पहले की तरह निर्धारित समय पर ही संचालित होंगे। पहले प्रदूषण और GRAP जैसी परिस्थितियों के चलते कार्यालय समय में अस्थायी बदलाव किए गए थे, लेकिन अब उन प्रतिबंधों के हटने के बाद पुरानी समय-सारिणी को फिर से लागू कर दिया गया है।
नए आदेश के अनुसार, एमसीडी के सभी दफ्तर सुबह 9 बजे खुलेंगे और शाम 5:30 बजे तक कार्य करेंगे। वहीं दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले कार्यालय सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होंगे।
हर विभाग में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य
सरकार ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी विभागों में बायोमेट्रिक मशीनों की स्थापना अनिवार्य होगी। जहां पहले से मशीनें उपलब्ध हैं, उन्हें पूरी तरह सक्रिय और कार्यशील रखना जरूरी होगा। हर कर्मचारी का पूरा विवरण—नाम, पद और सेवा रिकॉर्ड—इस सिस्टम में दर्ज किया जाएगा।
अब उपस्थिति केवल बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से ही मान्य होगी। इसके दायरे से कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बाहर नहीं रहेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव स्तर के अधिकारी और विभाग प्रमुख भी अपनी हाजिरी इसी प्रणाली से दर्ज करेंगे।
सख्त निगरानी और कार्रवाई का प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत विभागीय प्रमुखों को प्रतिदिन कर्मचारियों की उपस्थिति की समीक्षा करनी होगी। जो कर्मचारी देर से आएंगे, समय से पहले चले जाएंगे या अनुपस्थित रहेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्देशों के अनुसार, हर दिन दोपहर 12 बजे तक वरिष्ठ अधिकारियों को उपस्थिति रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को भेजनी होगी। इसके बाद हर महीने विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, जिसमें यह विवरण होगा कि कौन अधिकारी कब कार्यालय आया और कब गया।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें
सरकार के अनुसार, पिछले काफी समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते या फिर निर्धारित समय से पहले ही चले जाते हैं। इसके कारण आम जनता के काम प्रभावित होते हैं और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।
कोरोना महामारी के बाद कई विभागों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। इसके अलावा प्रदूषण और GRAP प्रतिबंधों के कारण कार्यालय समय में भी बदलाव देखने को मिला था। लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद सरकार ने पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया है।
अनुशासन और पारदर्शिता पर जोर
सरकार का मानना है कि बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू होने से सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और पारदर्शिता दोनों में सुधार होगा। इससे कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी और जनता के काम तेजी से निपटाए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।













